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बिहार में यूनिसेफ, यूएनडीपी और डब्ल्यूएचओ ने कामकाज किया बंद, टीकाकरण पर असर

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समस्तीपुर समेत पूरे बिहार के सभी 38 जिलों में कार्यरत यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड), डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) और यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशन्स डेवलपमेंट प्रोग्राम) ने अपना कामकाज बंद कर दिया है। इन संगठनों ने न केवल आगे काम न करने का निर्णय लिया है, बल्कि अपने कर्मचारियों-पदाधिकारियों को घर बिठा दिया है। सिर्फ जिला में कार्यरत डब्ल्यूएचओ कार्यालय को खोला गया है, जहां पर दो से तीन कर्मचारी तैनात हैं। इन संगठनों के काम न करने के कारण पूरे बिहार में नियमित टीकाकरण से लेकर विशेष टीकाकरण कार्यक्रम का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।

यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ और यूएनडीपी के बिहार के सभी 38 जिलों में कुल 706 कर्मचारी-पदाधिकारी कार्यरत थे। इनमें से यूनिसेफ के 368, विश्व स्वास्थ्य संगठन के करीब तीन सौ तो यूएनडीपी के 38 कर्मचारी-पदाधिकारी शामिल थे। साल 2005 से ये लोग कार्यरत थे। साल 2016 तक ये तीनों संगठन चला रहे थे, इसके बाद 2017 से 2021 तक सरकार और यूनिसेफ मिलकर चलाया।

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2021 से 2026 तक एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) और राज्य स्वास्थ्य समिति मिलकर चला रही थी और इन लोगों का बीते 31 मार्च तक कॉन्ट्रेक्ट था। बावजूद बीते 31 मार्च को तीनों संगठनों ने आगे काम न करने का निर्णय सुना दिया और कॉन्ट्रेक्ट आगे बढ़ाने से मना कर दिया। इसका परिणाम ये हुआ इन तीनों संगठनों के 706 कर्मचारी-पदाधिकारी घर बैठने को मजबूर हो गये। इन तीनों संगठनों के काम न करने की स्थिति में न केवल जिले में टीकाकरण बल्कि इसके प्रबंधन, निगरानी से लेकर प्रशिक्षण तक पर संकट आ गया है।

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