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मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की बात कहकर युवक को किया डिजिटल अरेस्ट, समस्तीपुर पुलिस ने पहुंचकर कराया मुक्त 

व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर खुद को अधिकारी बता रहे थे साइबर ठग

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समस्तीपुर : साइबर ठगों द्वारा एक युवक को कई घंटों तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने की कोशिश का मामला सामने आया है। हालांकि साइबर पुलिस की तत्परता से उक्त व्यक्ति को ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया। मिली जानकारी के अनुसार चकमेहसी थाना क्षेत्र के मालीनगर निवासी मनोरंजन त्रिवेदी को किसी अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई एवं ईडी का अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की बात कही और उन्हें डिजिटल अरेस्ट करने का डर दिखाया। इस दौरान ठग ने उन पर मानसिक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की।

परिजनों द्वारा घटना की सूचना मिलते ही साइबर थाना एवं चकमेहसी थाना की पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर मनोरंजन त्रिवेदी को वीडियो कॉल से अलग कराया। साथ ही उनका मोबाइल डिस्कनेक्ट करवाकर किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को रोक दिया गया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के झांसे से मुक्त कर काउंसलिंग भी की।

इस संबंध में साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने बताया कि भारत के किसी भी कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति इस तरह का कॉल या वीडियो कॉल कर खुद को अधिकारी बताकर डराने या पैसे मांगने की कोशिश करता है तो तुरंत अपने नजदीकी थाना या साइबर थाना में सूचना दें। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि ऐसे फर्जी कॉल से सतर्क रहें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करें।

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बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 31.74 लाख की कर ली थी साइबर ठगी :

समस्तीपुर जिले में डिजिटल अरेस्टिंग की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामनें आ चुके हैं जिसमें लोगों ने अपनी लाखों रुपये जमापूंजी लूटा दी है। इसी वर्ष जनवरी माह में एक बुजुर्ग से ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर डरा-धमका कर 31 लाख 74 हजार रुपये की साइबर ठगी कर ली थी, हालांकि बैंक कर्मियों की तत्परता से राशि फ्रिज कर दी गयी। साइबर ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग, क्राइम ब्रांच और जांच अधिकारी बताकर केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वरिष्ठ लिपिक 61 वर्षीय अरूण कुमार से मनी लॉन्ड्रिंग और आइडेंटिटी थेफ्ट केस में फंसाने की धमकी देते हुए डिजिटल अरेस्ट कर 31.74 लाख की ठगी कर ली थी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा परिसर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर अमित गुंजन ने सतर्कता बरतते हुए साइबर ठगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया व साइबर पुलिस की मदद से पूरी रकम को फ्रीज कर दिया था।

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