समस्तीपुर आश्रय स्थल का शौचालय बदहाल, खरीदकर पानी पीने की मजबूरी

समस्तीपुर : शहर के कर्पूरी बस पड़ाव स्थित आश्रय स्थल (रैन बसेरा) में पर्याप्त संसाधन तो हैं। लेकिन देखरेख की अभाव में जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब 20 दिनों से जारी शीतलहरी में आश्रय की तलाश कर रहे जरूरतमंद इधर-उधर भटक रहे हैं। आसपास के कुछ लोगों को छोड़ दें कि तो यहां पर अधिकतर लोगों को यह पता नहीं कि शहर में रैन बसेरा भी प्रशासन के द्वारा बनाया गया है। जानकारी के लिए मुख्य शहर के मुख्य जगहों पर बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। हालांकि, रैन बसेरा में रुकने के लिए बेड और मौसम के हिसाब से गर्म कपड़े की व्यवस्था की गई है।
लेकिन शौचालय और पीने के पानी की भी संकट है। लोगों को खरीदकर पानी पी रहे हैं। बावजूद रैन बसेरा एक शोभा की वस्तु बन गई है। तीन मंजिला इमारत में 50 बेड के साथ 24 घंटे रुकने के सुविधा दी गई। लेकिन प्रत्येक दिन औसतन 10-15 जरूरतमंद लोग ही यहां ठहरते हैं। दिन में इनकी संख्याओं कम हो जाती है लेकिन रात में संख्या बढ़ जाती है। जबकि नगर निगम का यह प्रयास है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोग यहां ठहरे।

उक्त आश्रय स्थल की पड़ताल में देखा गया कि 4 बजे करीब भूमितल के हॉल में 2-3 लोग ही बेड्स पर ठहरे हुए थे। उनके बेड्स पर कंबल बिछा था। तकिए के साथ ओढ़ने के लिए दो कंबल दिए गए थे। वहां मौजूद केयर-टेकर ने बताया कि यहां ठहरे बाकी लोग काम में गए हुए हैं। रात में लोग लौट कर आते हैं। रात में 10-15 लोग ठहरने वाले हो जाते हैं। प्रथम तक पर लगे बेड्स में कुछ बेड्स पर कंबल व चादर आदि फैले हुए दिखे।

केयर टेकर ने बताया कि रैन बसेरा में निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य करने वाले मजदूर इन बेड्स पर फिलहाल ठहरते हैं। अभी यहां वे लोग नहीं हैं, रात में आएंगे। यहां महिलाएं ठहरने नहीं आ रही हैं। यह भी कहा कि इस आशय स्थल में केवल एक टाइम रात में ही पांच लोगों को ही मुफ्त में भोजन देने की व्यवस्था है। नाश्ते की सुविधा नहीं है।




