एक धमाका और सब कुछ खत्म ! दिल्ली ब्लास्ट में समस्तीपुर के पंकज की मौ’त के बाद गांव में पसरा मातम

समस्तीपुर : दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार की देर शाम हुए दिल दहला देने वाले ब्लास्ट में समस्तीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हसनपुर फतेहपुर वार्ड संख्या-7 के पंकज सहनी (24) की भी मौत हो गयी। एक सामान्य परिवार का यह साधारण-सा बेटा अपने परिवार की खुशियों के लिए रोज संघर्ष करता था, लेकिन एक पल में उसकी दुनिया ही नहीं, उसके पीछे छूटे परिवार की दुनिया भी उजड़ गई। पंकज दिल्ली में अपने माता-पिता और भाइयों के साथ रहता था और करीब एक साल से कैब चलाकर परिवार चलाने में हाथ बँटा रहा था।
सोमवार की शाम भी वह रोज की तरह काम पर ही निकला था। अपने एक रिश्तेदार को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन छोड़ने जा रहे पंकज को जरा भी अंदेशा नहीं था कि यह उसका आखिरी सफर साबित होगा। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास अचानक हुए जोरदार धमाके ने पलक झपकते ही कई घरों के चिराग बुझा दिया, जिनमें से एक पंकज भी था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि मौके पर ही कई लोग मारे गए। पंकज भी उसी भयावह चपेट में आ गया। परिवार को फोन पर मिली यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी।

हादसे से कुछ ही घंटे पहले शाम करीब 4:30 बजे पंकज ने अपने दादा बालेश्वर सहनी को फोन किया था। दादा ने बताया कि वह बिल्कुल सामान्य तरीके से बात कर रहा था, जैसे रोज करता था। किसी को क्या पता था कि यही उसकी आखिरी आवाज़ होगी, आखिरी संवाद होगा। दादा अपने पोते की मौत की खबर सुनकर पूरी तरह टूट चुके हैं। खानपुर स्थित हसनपुर फतेहपुर गांव में अपने पोता को याद कर दादा बालेश्वर सहनी की आंखे डबडबा जा रही है।

दिल्ली ब्लास्ट में जान गंवाने वाले समस्तीपुर के पंकज सहनी की मां का रोकर बुरा हाल, बेटे के शव देख बिलख पड़ी मां; पंकज अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में ही रहता था#Samastipur #Delhi pic.twitter.com/cnS1NoO4T6
— Samastipur Town (@samastipurtown) November 11, 2025
गांव में पसरा मातम, हर आंख नम :
खबर मिलते ही हसनपुर फतेहपुर गांव में मातम छा गया। गांव के रास्तों पर सन्नाटा है, लोग घरों के बाहर खड़े एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं। पंकज के चाचा-चाची और छोटा चचेरा भाई जो गांव में ही रहते हैं, बदहवास हैं। बताया गया है कि पंकज तीन साल पहले अपने भाई की शादी में गांव आया था। तब घर में खुशियों का माहौल था। किसी ने नहीं सोचा था कि अगली बार उसका नाम गांव में इस तरह लिया जाएगा।
पंकज परिवार की आर्थिक रीढ़ था। दिल्ली में कैब चलाकर वह अपने परिवार की जरूरतें पूरी करता था। उसकी कमाई से ही घर चलता था। अब उसके जाने के बाद परिवार पर बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। दिल्ली में रह रहे माता-पिता व भाई का रो-रोकर बुरा हाल है।

लाल किला के पास हुए इस ब्लास्ट ने पूरे इलाके को हिला दिया है। गांव के लोग सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह के आतंकपूर्ण घटनाक्रम निर्दोषों की जिंदगी छीन लेते हैं और परिवारों को उम्रभर का दर्द दे जाते हैं। इधर गांव में रह रहे दादा बालेश्वर सहनी ने बताया की पंकज का अंतिम संस्कार मंगलवार को दिल्ली में कर दिया गया।
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