‘जलाया गया पैसा अशोक चौधरी का’ प्रशांत किशोर की ललकार, बोले-अगर इस्तीफा नहीं हुआ तो…

प्रशांत किशोर ने कहा कि- जिस इंजीनियर ने पिछले दिनों पैसा घर में जलाया था वो भी अशोक चौधरी का ही कमीशन का पैसा था. अगर अशोक चौधरी इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनका घेराव करेंगे, उन्हें राजनीति नहीं करने देंगे. 20 हजार करोड़ का कांट्रैक्ट दिया है, अभी अशोक चौधरी ने जिसमें पांच प्रतिशत की राशि वसूला गया है. हर रिलीज में 5 प्रतिशत की राशि ली जा रही है. जो पैसा कुछ दिन पहले नोट जलाया गया था वो राशि उनके लिए ही लाया जा रहा था. इस मामले पर पूरी जानकारी दें. अशोक चौधरी का घेराव होगा. अगर, उनका इस्तीफा नहीं हुआ तो राज्यपाल के पास जाऊंगा. करवाई के लिए पांच दिन में अपना नोटिस वापस लीजिए. नहीं लिया तो पांच सौ करोड़ रुपया के मानहानि का नोटिस भेजूंगा.
जन सुराज आंदोलन के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने अपने ऊपर उठे सवालों का जवाब देते हुए पार्टी और व्यक्तिगत वित्त का खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि कई लोग यह सवाल उठाते थे कि पीके के पास पैसा कहां से आता है. इसलिए अब यह साफ कर देना जरूरी है कि पैसा कहां से आता है और कहां खर्च होता है. प्रशांत किशोर ने बताया कि पिछले तीन सालों में उन्हें 241 करोड़ रुपये सलाहकार शुल्क (कंसल्टेंसी फीस) के तौर पर मिले. उन्होंने कहा, “जिसे भी मैंने राजनीतिक सलाह दी, उसने मुझे पैसा दिया. यह पैसा सरस्वती का है, मेहनत से कमाया गया है. मैंने चोरी नहीं की, केवल अपने काम का पैसा लिया है.”

उन्होंने आगे बताया कि इन तीन सालों में उन्होंने 30 करोड़ रुपये GST और 20 करोड़ रुपये आयकर के रूप में जमा किए हैं. इतना ही नहीं, पीके ने दावा किया कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आय से 98 करोड़ रुपये जन सुराज पार्टी को दान किए हैं. प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार की जनता चाहे मुझे पैसा दे या न दे, मेरे पास जो भी पैसा है, मैं उसे बिहार की जनता के लिए खर्च करूंगा.”

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने 470 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. इनमें 320 आईएएस, 60 आईपीएस और 90 अन्य सेवाओं के अधिकारी शामिल हैं. सभी पर्यवेक्षक 3 अक्टूबर को आयोग के साथ बैठक करेंगे, इसके बाद 4 अक्टूबर को चुनाव आयोग की उच्च स्तरीय टीम दो दिवसीय दौरे पर पटना आएगी. टीम चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेगी और अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश देगी. आयोग का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं.





