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बिहार वोटर लिस्ट केस: सुप्रीम कोर्ट से SIR पर डबल मौखिक राहत; एक आयोग को, दूसरी विपक्ष को

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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को बिहार की मतदाता सूची के चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर लंबी सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने मंगलवार को अगली सुनवाई और बहस की तारीख तय करने की बात कही है। कोर्ट ने आज मौखिक रूप से दो आदेश दिया है जो चुनाव आयोग और याचिका दायर करने वाले विपक्षी नेताओं के लिए राहत की बात है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को मतदाता सूची का मसौदा (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) जारी करने पर रोक नहीं लगाई है जो आयोग के लिए राहत की बात है।

एक पक्षकार ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन रोकने की अपील की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर इस मांग को ठुकरा दिया कि अगर बहस के दौरान कोर्ट उनकी दलीलों से संतुष्ट होता है तो पूरी प्रक्रिया को भी रद्द कर सकता है। कोर्ट द्वारा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर रोक नहीं लगाने से चुनाव आयोग वोटर लिस्ट रिवीजन का काम निर्धारित कार्यक्रम के तहत जारी रख सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट से दूसरी राहत याचिका दायर करने वाले विपक्षी नेताओं और दूसरे संगठनों को भी मिली है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार कार्ड और मतदाता फोटो पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) लेने कहा है। याचिका दायर करने वाले कई पक्षकार आधार, वोटर और राशन कार्ड को आयोग द्वारा लिए जा रहे 11 दस्तावेजों की सूची में नहीं रखने का विरोध कर रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को चुनाव आयोग को सुझाव दिया था कि वोटर से लिए जा रहे कागज में वो आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड को शामिल करने पर विचार करे। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने हलफनामा दायर करके कहा कि ये तीनों पेपर भरोसेमंद नहीं हैं क्योंकि इन्हें गलत तरीके से फर्जी बनाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को आयोग के इस स्टैंड को आड़े हाथ लिया और कहा कि धरती पर कोई भी पेपर फर्जी बनाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि आयोग ने जो 11 पेपर मांगे हैं, उन्हें भी फर्जी बनाया जा सकता है।

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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच ने राशन कार्ड को लेकर चुनाव आयोग के विरोध का नोटिस लेते हुए मौखिक रूप से आयोग से कहा कि वो बाकी दोनों कानूनी पहचान पत्र आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को ले क्योंकि उनके सही होने की धारण है। गड़बड़ी हो तो केस टू केस बेसिस पर आप देखिए। जस्टिस सूर्यकांत ने आयोग से कहा कि इस प्रक्रिया का मकसद बड़े पैमाने पर नाम काटना नहीं जोड़ना होना चाहिए। चुनाव आयोग ने कोर्ट से कहा कि वो आधार कार्ड पहले ले ले रहा है लेकिन उसके साथ एक और पेपर मांग रहा है।

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चुनाव आयोग आधार कार्ड और वोटर कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट की 10 जुलाई को दी गई सलाह को अब तक नजरअंदाज कर रहा है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामा में इनकी विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाया है। बिहार में मतदाताओं को फॉर्म देने और भरा हुआ फॉर्म जरूरी दस्तावेजों के साथ वापस लेने का बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) का काम पूरा हो चुका है।

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अब 1 अगस्त को चुनाव आयोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। फिर एक महीने तक दावा और आपत्ति का काम चलेगा। जिनका नाम गलत रह गया होगा, उस पर कोई आपत्ति करेगा तो उसे पदाधिकारी संतुष्ट होने के बाद हटा देंगे। जिनका नाम छूटा होगा, उन्हें फॉर्म भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन देना होगा, जिसे संतुष्ट होने के बाद अफसर जोड़ देंगे। अब ज्यादा से ज्यादा इस दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में आधार कार्ड और वोटर कार्ड का इस्तेमाल हो सकता है।

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वैसे, चुनाव आयोग ने वोटर गणना फॉर्म भरवाने का काम पूरा होने के बाद वोटर लिस्ट में दर्ज 7.89 करोड़ मतदाताओं का 100 फीसदी हिसाब दे दिया है। 91.69 प्रतिशत वोटरों से फॉर्म आ गया है। 2.83 फीसदी मृत मिले और 4.59 फीसदी बिहार से बाहर बस गए। 0.89 प्रतिशत के नाम एक से अधिक मतदान केंद्र पर मिले थे। यह सब मिलाकर 100 फीसदी है। आयोग ने इस अभियान को सफल बताया है और कहा है कि किसी भी वाजिब वोटर का नाम नहीं कटेगा।

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