“होमगार्ड रोबोट नहीं, हम भी थकते हैं..सर”, कई प्रकार की समस्याओं से परेशान हैं गृह रक्षक जवान, पढ़ें स्पेशल स्टोरी

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समस्तीपुर :- खाकी वर्दी पहन पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले होमगार्ड आज हर चौराहे पर मुस्तैद नजर आते हैं। सेवा शर्तों में अनिश्चितता, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, सरकारी आवास न मिलने का दर्द उन्हें भी है। निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी करनी पड़ती है। गृह रक्षक कई प्रकार की समस्याओं से परेशान हैं। होमगार्ड कहते हैं कि हम रोबोट नहीं हैं… हम भी थकते हैं। सर्दी, गर्मी या फिर बारिश हो हर मौसम में अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहने वाले होमगार्ड के जवानों की अपनी तमाम समस्याएं हैं। जिनसे लड़ते हुए यह लगातार अफसरों के आदेश का पालन करने में लगे हैं।
होमगार्डों से उनकी समस्याओं पर चर्चा के दौरान इनका दर्द छलक पड़ा। कहने को तो इस विभाग के अधिकारी व कर्मी सरकारी हैं, लेकिन गृह रक्षक जवान 78 वर्षों के बाद भी दैनिक भोगी कर्मी हैं। सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिलने से इन्हें लोन तक नहीं मिलता है। कभी ड्यूटी मिली तो लगातार, नहीं मिली तो साल-सालभर घर बैठे रहना पड़ता है। लगातार ड्यूटी के दौरान इन्हें साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिलता है।

यातायात से लेकर आपातकालीन ड्यूटी उन्हें करनी पड़ती है। छापेमारी के दौरान भी ये सबसे आगे रहते हैं। कई बार लोगों के विरोध के दौरान वे चोटिल भी हो जाते हैं। सबसे बड़ा दर्द यह कि होमगार्ड जवानों को ड्यूटी लेने के लिए भी अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ती है। ड्यूटी के लिए कमान कटने के बाद दूरी चाहे जितनी भी हो, गृहरक्षकों को खुद के साधन से आना-जाना पड़ता है। इसमें दैनिक वेतन का अधिकांश हिस्सा खर्च हो जाता है।

शत्रुध्न झा, अशोक कुमार सिंह, जय नारायण झा, गीता सिंह, पिंकी कुमारी, बबीता कुमारी, संज झा आदि बताते हैं कि सरकारी कर्मी का दर्जा देने समेत अन्य मांगों के लिए गृह रक्षक स्वयंसेवक संघ लगातार संघर्ष कर रहा है लेकिन इस दिशा में कोई सफलता नहीं मिल पायी है। हमलोगों की समस्याओं की फेहरिस्त लंबी है। लगातार काम करने के बाद भी हमलोगों को साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता। सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिलने के कारण हमलोगों को बैंकों से सर्विस लोन मिलने में भी परेशानी होती है। कई गृह रक्षकों को साल भर काम भी नहीं मिलता।
इसके कारण हमारे कई साथियों को बेरोजगारी का भी सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाता है। कर्ज लेकर परिवार चलाना हमलोगों की मजबूरी हो जाती है। गृहरक्षक विभाग की स्थापना 1946 में हुई थी। लगभग 78 साल से हमलोग दैनिक भोगी कर्मी बनकर काम कर रहे हैं। सरकार को हमारी चिंता नहीं है। हम जवानों को प्रतिदिन 774 रुपए के हिसाब से दैनिक मजदूरी मिलती है। ड्यूटी मिली तो ठीक, लेकिन जब काम नहीं मिलता तब परेशानी होती है।
संघ के अध्यक्ष कैलाश झा ने बताया कि समस्तीपुर पुलिस जिले में 529 होमगार्ड जवान कार्यरत हैं। ये सभी जवान दैनिक भोगी कर्मी कहलाते हैं। हमलोगों को सरकारी कर्मी की मान्यता नहीं मिली है। सभी सरकारी विभागों, बैंकों व अधिकारियों की सुरक्षा में हमलोग डटे रहते हैं। जवानों को थाने में भी ड्यूटी देनी होती है, लेकिन जवानों को सप्ताहिक छुट्टी भी नहीं मिलती है। यदि किसी कारणवश वे ड्यूटी नहीं जा पाते तो उस दिन की मजदूरी से हाथ धोना पड़ता है। महंगाई के दौर में जवानों को कोई भत्ता भी नहीं मिलता है। इतने कम मानदेय पर परिवार चलाना और बच्चों को शिक्षा दिलाना बेहद मुश्किल होता है। उच्च शिक्षा और बच्चियों की शादी के लिए हमें कर्ज का सहारा लेना पड़ता है। हम लोगों को प्रतिदिन 774 रुपये के हिसाब से राशि मिलती है। इतने कम मानदेय पर ड्यूटी करनी पड़ती है।

कम मानदेय में परिवार चलाना काफी कठिन होता है। हमलोग इतनी मेहनत करने के बाद भी परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। हमलोगों को दैनिक भोगी कर्मी बना दिया गया है। इतने लम्बे वर्षों के बाद भी सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिल सका है। इससे परेशानी होती है। सरकारी कर्मी का दर्जा मिलने पर हमारे लिए भी विकास के द्वार खुल जाएंगे। सम्मानपूर्वक जीने का हमें भी अधिकार है। यातायात व्यवस्था संभालने के दौरान कुछ लोग रौब दिखाते हुए बहुत गंदे तरह से बात करते हैं। लोगों को हमारे साथ भी सहजता और शालीनता से बात करनी चाहिए। अगर आप किसी को सम्मान नहीं दे सकते तो अभद्रता भी न करें।
बिहार रक्षा वाहिनी स्वयंसेवक संघ होमगार्ड जवानों को हक दिलाने के लिए लगातार आंदोनल कर रहा है। संघर्षो के बाद भी इन लोगों को अब तक सामान काम के बदले सामान वेतन नहीं मिल सका है। आज भी ये दैनिक वेतन भोगी कर्मी हैं। गृह रक्षकों का कहना है कि शिक्षकों ने चंद वर्ष आंदोलन किया तो उन्हें समान काम के एवज में समान वेतन मिला। कारण कि उनकी संख्या अधिक है। हमारी संख्या कम है, इसलिए सरकार भी हमलोगों की मांग को हल्के में ले रही है। होमगार्ड जवानों की ड्यूटी सभी विभागों में लगती है। सभी थानों में जवानों की ड्यूटी लगती है। विधि व्यवस्था बिगड़ने पर सबसे आगे होमगार्ड जवानों को रखा जाता है।

रात्रि गश्ती व छापेमारी में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं। लेकिन अधिकारियों और सरकार की नजर हम पर नहीं पड़ती है। सबसे ज्यादा परेशानी यातायात ड्यूटी के दौरान शौचालय की होती है। छापेमारी के दौरान विरोध होने पर जवान घायल हो जाते हैं। इससे ड्यूटी नहीं कर पाने की स्थिति में दैनिक वेतन से वंचित होना पड़ता है। पोस्ट नहीं होने से कड़ाके की ठंड, चिलचिलाती धूप या तेज बारिश में खुले में ड्यूटी करनी पड़ती है। सबसे ज्यादा परेशानी तेज बारिश मे होती है। ये लोग आस पास के दुकानों या घरो में छिपते है
अभद्रता करने वालों पर हो सख्त कार्रवाई :
होमगार्ड जवान शत्रुध्न झा ने कहा कि अधिकतर की ड्यूटी जिले की यातायात व्यवस्था संभालने में लगाई जाती है। बाजारों में जाम की समस्याओं से निपटने के लिए भी होमगार्ड को दिनभर जूझना पड़ता है। इस दौरान कई बार लोगों से बहस भी हो जाती है। कुछ जगहों पर लोग होमगार्डों से अभद्रता पर उतर आते हैं। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि जब इस तरह के मामलों की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जाती है तो उसमें सिफारिश और दबाव के चलते समझौता करना पड़ता है। इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। और अधिकारियों को उनकी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए ताकि हमारी समस्याओं से रूबरू हो सकें। परिवार के साथ कभी जरूरी काम के लिए जाना पड़ता है तो इसके लिए छुट्टी नहीं मिलती है। जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है।

समस्या :
1. समान सेवा देने के बाद भी गृहरक्षक जवानों को सरकार की ओर से समान वेतन नहीं मिलता है। सिपाहियों से अधिक डॺूटी होमगार्ड से लिया जाता है।
2. वर्षों सेवा देने के बावजूद होमगार्ड जवानों को अब तक दैनिक भोगी कर्मी का ही दर्जा मिल सका है। इनको सरकारी कर्मी का दर्जा मिलना चाहिए।
3. चौबीस गुना सात घंटे के फॉमूले पर होमगार्ड के जवान ड्यूटी करते हैं। छुट्टी तो दूर साप्ताहिक अवकाश के लिए भी ये तरस रहे हैं।
4. महंगाई बढ़ने के बावजूद होमगार्ड जवानों को किसी प्रकार का कोई अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलता है। इसे पाने के लिए वे वर्षों से संर्घष कर रहे हैं।
5. सरकारी दर्जा नहीं मिलने से इनको सर्विस लोन अथवा अन्य प्रकार का ऋण लेने में परेशानी होती है। सरकारी कर्मी का दर्जा मिलना चाहिए।
सुझाव :
1. इतनी लंबी सेवा देने के बाद इनको सरकारी दर्जा नहीं मिला है। शिक्षकों की भांति होमगार्ड जवानों को सरकारी कर्मी का दर्जा मिलना चाहिए।
2. बिहार पुलिस की तरह इन जवानों को भी एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण होना चाहिए। एक ही जगह ड्यूटी करने से इन्हें परेशानी होती है।
3. अन्य सरकारी विभागों की तरह होमगार्ड जवानों को भी साप्ताहिक अवकाश मिलना चाहिए। इसके बाद सरकारी छुट्टी भी मिलनी चाहिए।
4. बैंकों से इन जवानों को आसानी से कम दर पर लोन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि इनके बच्चों को भी बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
5. सरकार को विशेष रूप से इन जवानों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए योजना बनानी चाहिए, ताकि वे बराबरी के साथ आगे बढ़ सकें।

होमगार्ड जवानों ने क्या कुछ कहा :
गृह रक्षको को महंगाई भत्ता के साथ ही पुलिस को मिलने वाली अन्य सुविधा अलग से अभिलंब दी जाए। वर्तमान में 50% महंगाई भत्ता अन्य कर्मचारियों को दिया जाता है। वहीं गृह रक्षक वर्षों से लगातार कर्तव्य पर रहने के कारण मानवीय विचार करते हुए माह में 5 दिन मात्र भत्ता सहित छुट्टी प्रदान की जाए साथ ही महिला होम गार्ड को 2 दिन का विशेष अवकाश एवं मातृत्व अवकाश भी दिया जाए।
– कैलाश झा, अध्यक्ष, बिहार गृह रक्षा वाहिनी स्वयंसेवक संघ
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हम लोगों को प्रतिदिन 774 रुपये के हिसाब से राशि मिलती है। इतने कम मानदेय पर ड्यूटी करनी पड़ती है। कम मानदेय में परिवार चलाना काफी कठिन होता है। सरकारी कर्मी का दर्जा मिलने पर हमारे लिए भी विकास के द्वार खुल जाएंगे। सम्मानपूर्वक जीने का हमें भी अधिकार है।
– केशव कुमार
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होमगार्ड जवानों को यात्रा भत्ता नहीं मिलता है। ड्यूटी के लिए कमान कट जाने पर तय जगह पर खुद के खर्च पर यात्रा कर पहुंचना पड़ता है। भले यात्रा भत्ता ड्यूटी में मिलने वाली राशि से अधिक ही क्यों न हो? बड़े कार्यक्रमों में ड्यूटी लगने पर अधिक परेशानी होती है। पुलिस कर्मी व अधिकारी को वाहनों की सुविधा मिलती है। हमलोगों को पैदल गंतव्य तक जाना पड़ता है।
– शत्रुध्न झा
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इतने कम मानदेय पर घर चलाने में मुश्किल हो रहा है। आर्थिक संपन्नता नहीं होने से बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। बच्चों को उच्च शिक्षा देने में परेशानी होती है। हमलोग ड्यूटी करके भी अपने बच्चों बेहतर संस्थान में नामांकन नहीं करा पा रहे हैं।
– अशोक कुमार सिंह
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सबसे ज्यादा परेशानी साप्ताहिक छुट्टी नहीं मिलने से होती है। 24 घंटे ड्यूटी करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में वर्दी धोने व सुखाने का भी समय नहीं मिलता है। वर्दी गंदा होने पर भी दिक़्कत आती है। ऐसे में हमलोगों को सुविधा मिलना चाहिए।
– संजय झा
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होमगार्ड हर माहौल में ड्यूटी करते हैं। उसके बाद भी हमें सम्मान नहीं मिलता। सरकार को विशेष रूप से इन जवानों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए योजना बनानी चाहिए, ताकि वे बराबरी के साथ आगे बढ़ सकें।
– जय नारायण झा
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होमगार्ड का वेतन अन्य पुलिस बलों की तुलना में बहुत कम होता है, जबकि हम भी वही काम करते हैं।
– राम शकल प्रसाद सिंह
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होमगार्ड को सामाजिक सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है जैसे कि पेंशन, बीमा। इसके अलावे लोन भी बैंक से नहीं मिल पाता है।
– अवधेश कुमार झा
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हम लोगों को 3 वर्ष में एक बार वर्दी का पैसा मिलता है जबकि साल भर भी वर्दी नहीं चल पाती। हम लोगों को हर वर्ष वर्दी का पैसा मिले।
– भास्कर प्रसाद ठाकुर
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बाजारों में जाम की समस्याओं से निपटने के लिए भी होमगार्ड को दिनभर जूझना पड़ता है। इस दौरान कई बार लोगों से बहस भी हो जाती है। कुछ जगहों पर लोग होमगार्डों से अभद्रता पर उतर आते हैं।
– पिंकी कुमारी
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परिवार के साथ कभी जरूरी काम के लिए जाना पड़ता है तो इसके लिए छुट्टी नहीं मिलती है। जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है।
– गीता सिंह
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अन्य पुलिस बलों की तुलना में हमारा वेतन बहुत कम होता है। होमगार्ड्स को अक्सर वेतन में देरी का सामना करना पड़ता है। यह दूर होना चाहिए। महिला होमगार्ड को 2 दिन का विशेष अवकाश एवं मातृत्व अवकाश भी दिया जाए।
– बबीता कुमारी
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बोले जिम्मेदार :
होमगार्डों को जिलास्तर पर अगर कोई समस्या है तो इसका समाधान किया जाएगा। उनका प्रमुख रूप से समान काम का समान वेतन समेत अन्य 21 सूत्री जो भी मांगे है वह मुख्यालय स्तर से होगी। इसके लिये मुख्यालय स्तर से मार्गदर्शन के बाद आगे की कार्रवाई होगी। इनके ज्ञापन को मुख्यालय भेजा गया है।
मो. ऐहतशाम अली, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, समस्तीपुर

