उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी के साथ गए तो नीतीश को कितना नुकसान, क्या 2024 में बदल जाएंगे चुनावी समीकरण?

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राष्ट्रीय लोक जनता दल (रालोजद) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति गर्मा गई है। इस मुलाकात के बाद कुशवाहा के 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ जाने की अटकलें और तेज हो गई हैं। दो महीने पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए में शामिल होने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। कुशवाहा की कुर्मी-कोइरी समाज पर अच्छी पकड़ है और ये जेडीयू के कोर वोटर माने जाते हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में बीजेपी महागठबंधन के वोटबैंक पर चोट कर सकती है।
उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान पश्चिमी चंपारण से सांसद और पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी मौजूद रहे। शाह और कुशवाहा के बीच करीब पौने एक घंटे तक बातचीत हुई। कुशवाहा के जेडीयू छोड़कर रालोजद नाम से नई पार्टी बनाने के बाद अमित शाह से यह पहली मुलाकात है। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों गृह मंत्री जब पटना आए थे, तभी यह मीटिंग होनी थी। मगर कुछ कारणों से दोनों नेता नहीं मिल सके थे। इसलिए कुशावाहा, शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे।

शाह और कुशवाहा की किस मुद्दे पर बात हुई?
बीजेपी नेता संजय जायसवाल ने अमित शाह और उपेंद्र कुशवाहा की मीटिंग को औपचारिक मुलाकात बताया है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या कुशवाहा एनडीए में शामिल होने जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। हालांकि, माना जा रहा है कि आगामी चुनाव से पहले कुशवाहा बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले हैं। इसी सिलसिले में दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।
कुशवाहा के एनडीए में जाने से नीतीश को कितना नुकसान?
कभी नीतीश कुमार के खास माने जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा के बीजेपी नीत एनडीए में जाने से महागठबंधन को आगामी चुनाव में बड़ा झटका लग सकता है। उपेंद्र कुशवाहा अति पिछड़ा वर्ग (खासकर कुर्मी-कोइरी) वोटबैंक की राजनीति करते हैं। इसे लव-कुश समीकरण भी कहा जाता है, जिसपर नीतीश की अच्छी पकड़ है। अगर कुशवाहा एनडीए में शामिल होती है तो नीतीश के वोटबैंक में बीजेपी सेंधमारी कर सकती है। बीजेपी 2024 में कुशवाहा को जेडीयू के प्रभाव वाली कुछ सीटों पर लड़ने का मौका देकर महागठबंधन के खिलाफ घेराबंदी कर सकती है।

बीजेपी की 12 फीसदी वोटों पर नजर
नीतीश कुमार के आरजेडी और कांग्रेस के साथ बिहार में सरकार बनाने के बाद महागठबंधन मजबूत हो गया है। बीजेपी इसकी काट निकालने के लिए छोटे दलों को अपने साथ करने की कवायद में जुटी है। दलित राजनीति करने वाले लोजपा के दोनों गुट बीजेपी के साथ हैं। इसके अलावा रालोजद को एनडीए में शामिल कर के बीजेपी लवकुश समीकरण साध सकती है। हाल ही में पार्टी ने कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया।

इसके अलावा वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के भी एनडीए में जाने की अटकलें हैं। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा में इजाफा किया था। मुकेश सहनी की मल्लाह वोटरों पर अच्छी पकड़ है। इस तरह बीजेपी मल्लाह, कुर्मी, कोइरी और पासवान जातियों को साधने की कोशिश कर रही है। इन जातियों का बिहार में करीब 12 फीसदी जनाधार है, जो किसी भी चुनाव में एक पार्टी की जीत या हार में बड़ी भूमिका निभा सकता है।



