समस्तीपुर में 105 युवाओं के रेस्क्यू केस मामले में यौन शोषण और अंतरराज्यीय नेटवर्क एंगल से भी जांच, पहुंची CID की टीम

समस्तीपुर : शहर के भोला टॉकीज गुमटी स्थित कालिका कॉम्प्लेक्स में संचालित वीजन ट्रेडिंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (गेलवे) के माध्यम से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवक-युवतियों को बंधक बनाकर ठगी करने के मामले की जांच तेज हो गई है। पीड़ित युवतियों के आरोपों के बाद पुलिस मामले की जांच यौन शोषण के एंगल से भी कर रही है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि आरोपित युवक-युवतियों पर कड़ी निगरानी रखते थे। उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए जाते थे और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती थी।
कई युवतियों ने आरोप लगाया है कि भागने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ ने टीम लीडर पॉली उरांव और आरडी सुष्मिता कुमारी पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए हैं। इस बीच मामले की जांच में अन्य एजेंसियां भी जुट गई हैं। शुक्रवार को सीआईडी के कमजोर वर्ग प्रकोष्ठ के डीएसपी नरेश पासवान समस्तीपुर पहुंचे। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर में पीड़ित युवतियों के बयान दर्ज किए तथा एसपी अरविंद प्रताप सिंह से मामले की विस्तृत जानकारी ली। उनकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी। मुफस्सिल थानाध्यक्ष अजीत प्रसाद सिंह के आवेदन पर आठ लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें से पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

गृह विभाग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट :
105 युवक-युवतियों और नाबालिगों के रेस्क्यू के बाद गृह विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग ने एसपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में गिरोह के संचालन के तरीके, अब तक की कार्रवाई, गिरफ्तार एवं फरार आरोपितों, पीड़ितों की स्थिति तथा संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी मांगी गई है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में युवाओं को लाकर रखने की जानकारी स्थानीय स्तर पर पहले क्यों नहीं मिल सकी।

पांच आरोपी भेजे गए जेल, तीन मुख्य अभियुक्त फरार :
पुलिस ने मुफस्सिल थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। जेल जाने वालों में दरभंगा जिले के बाजीपुर निवासी शाखा कुमारी, असम निवासी अंजुलियस ओरंग, गया निवासी प्रमोद ठाकुर, असम निवासी पॉली उरांव तथा लखीमपुर निवासी पोलो उरांव शामिल हैं। वहीं, पुलिस कंपनी के फ्रेंचाइजी होल्डर पुनीत प्रांजल, कंपनी के मैनेजर गुड्डू कुमार (पुत्र सुरेंद्र महतो, ग्राम- अंदौली, थाना- खेवाड़ा, जिला- शेखपुरा) और आर्यन कुमार यादव (पुत्र कमल यादव, वार्ड 8, निर्मली, जिला- सुपौल) की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

दरभंगा कनेक्शन और नेटवर्क की जांच :
पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क बिहार के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों तक फैला हो सकता है। जांच के दौरान दरभंगा के दिल्ली मोड़ क्षेत्र में भी इसी तरह की गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली है। पुलिस वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क के विस्तार की भी जांच कर रही है। फरार आरोपित पप्पू खान, गुड्डू, करण, राजा, आर्यन यादव और राहुल जायसवाल की तलाश जारी है।

नाबालिगों को परिजनों के हवाले किया गया :
रेस्क्यू किए गए सभी नाबालिग लड़के-लड़कियों की मेडिकल जांच के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। अन्य युवतियों को फिलहाल वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित रखा गया है। परिजनों के पहुंचने पर उन्हें भी सुपुर्द कर दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार फरार सदस्यों और उनके बाहरी संपर्कों की जांच जारी है।
युवाओं को दिखाया जाता था लखपति बनने का सपना :
पीड़ित युवक-युवतियों के बयानों से पता चला है कि पूरा नेटवर्क नेटवर्क मार्केटिंग और ब्रेनवॉशिंग के मॉडल पर संचालित किया जा रहा था। युवाओं को पहले सरकारी नौकरी और फिर कुछ ही महीनों में लखपति बनने का सपना दिखाकर जाल में फंसाया जाता था। गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और मोबाइल कॉल के माध्यम से बेरोजगार युवक-युवतियों से संपर्क करते थे। उन्हें कृषि विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था।

समस्तीपुर पहुंचने पर उनसे रजिस्ट्रेशन और ट्रेनिंग किट के नाम पर 25 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। पीड़ितों के अनुसार इसके बदले उन्हें कॉस्मेटिक और सामान्य उपयोग की वस्तुओं वाली एक किट दी जाती थी, जिसकी वास्तविक कीमत बहुत कम थी। उन्हें बताया जाता था कि यह नौकरी प्रक्रिया का हिस्सा है और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नियुक्ति पत्र मिल जाएगा।

सुबह छह बजे से शुरू होता था ब्रेनवॉश :
युवक-युवतियों को अलग-अलग हॉस्टलों और किराये के मकानों में रखा जाता था। प्रतिदिन सुबह छह बजे से दस बजे तक चलने वाली क्लासों में नौकरी की तैयारी से अधिक नए लोगों को जोड़ने और नेटवर्क बढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल फोन जमा करा लिए जाते थे और सफलता तथा तेजी से अमीर बनने की कहानियां सुनाकर युवाओं को प्रभावित किया जाता था।

ठगी की चेन बनाकर बढ़ाया जा रहा था नेटवर्क :
जांच में सामने आया है कि गिरोह का उद्देश्य नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि नए लोगों को जोड़कर ठगी के नेटवर्क का विस्तार करना था। प्रत्येक सदस्य को नए लोगों से रकम जमा कराने पर कमीशन का लालच दिया जाता था। इसी तरीके से एक व्यक्ति दूसरे और दूसरा तीसरे व्यक्ति को जोड़ता था। बेरोजगार युवाओं की मजबूरी और बेहतर भविष्य की उम्मीद का फायदा उठाकर यह नेटवर्क लगातार फैलाया जा रहा था।


