Samastipur

समस्तीपुर में तापमान बढ़ने से सूखने लगे सब्जी के पौधे, भीषण गर्मी से खेती पर संकट

समस्तीपुर : जिले में लगातार 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने से खेती पर प्रतिकूल असर साफ दिखने लगा है। तेज धूप और पछुआ हवा के कारण खेतों की ऊपरी सतह की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे खासकर सब्जी और मक्का की फसल पर गंभीर असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ी हुई वाष्पीकरण दर के कारण सिंचाई का पानी भी जल्द सूख जा रहा है, जिससे पौधों पर तापीय तनाव बढ़ रहा है। सब्जी उत्पादक किसानों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है।

भिंडी, परवल, बैंगन और मिर्च जैसी फसलों के पौधे सूखने लगे हैं और कई जगहों पर पत्तियां झुलस रही हैं। दोपहर के समय टमाटर और खीरा की फसल मुरझा जा रही है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। मिर्जापुर के सब्जी उत्पादक किसान श्याम विनोद महतो ने बताया कि इतनी तेज गर्मी पहले कम ही देखने को मिलती थी। सुबह सिंचाई करने के बावजूद दोपहर तक खेत सूख जाता है। भिंडी और मिर्च के पौधे झुलसने लगे हैं, जिससे नुकसान बढ़ता जा रहा है।

वहीं खैरा के धर्मेन्द्र महतो ने कहा कि डीजल पंप से सिंचाई करने में खर्च काफी बढ़ गया है। दिन में दो बार पानी देना पड़ रहा है, फिर भी पौधे संभल नहीं पा रहे हैं। किसान अनिल महतो का कहना है कि बैंगन और परवल की फसल पर गर्मी का सीधा असर दिख रहा है। कई पौधे सूख चुके हैं और जो बचे हैं, उनकी बढ़वार रुक गई है। रामकुमार महतो ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर एक हफ्ते तक यही हाल रहा तो सब्जी की पैदावार आधी रह जाएगी, जिससे आमदनी पर भारी असर पड़ेगा। वहीं मक्का की फसल भी इस भीषण गर्मी से अछूती नहीं है।

इस समय बाली में दाना बनने का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है, लेकिन अधिक तापमान के कारण पौधे कमजोर पड़ रहे हैं, जिससे दाना भराव प्रभावित होने की आशंका है। जिले के कई गांवों में किसान सुबह और शाम सिंचाई कर किसी तरह फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, डीजल पंप के उपयोग से लागत में इजाफा हो रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि इस परिस्थिति में मल्चिंग, हल्की एवं बार-बार सिंचाई, तथा जैविक नमी संरक्षण उपाय अपनाकर कुछ हद तक राहत पाई जा सकती है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान खेतों में सूखी घास या पुआल बिछाकर नमी बनाए रखें। यदि अगले एक सप्ताह तक तापमान इसी स्तर पर बना रहा, तो सब्जी उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है। इसका असर बाजार में भी देखने को मिल सकता है, जहां सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए भी यह मौसम चिंता का विषय बन गया है।

Avinash Roy

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