समस्तीपुर : सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटती नजर आ रही है। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही नये सिविल सर्जन डॉ. एन.के. चौधरी लगातार एक्शन मोड में हैं और अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को सुधारने में जुटे हुए हैं। अस्पताल के ओटी, महिला वार्ड समेत अन्य वार्डों में जहां पहले अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिलती थीं, वहीं अब साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मरीजों के बेड पर नई बेडशीट बिछाई जा रही है और वार्डों में नए पर्दे लगाए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक वातावरण मिल सके। नये सिविल सर्जन ने बीते दिनों सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड, प्रसूता वार्ड, महिला वार्ड समेत अन्य वार्डों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाई गई खामियों को लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी हाल में मरीजों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि पूर्व में वेंटिलेटर होने बावजूद सदर अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा मरीजों को उपलब्ध नहीं हो रहु थी। इस कारण गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था। यहां तक कि तत्कालीन सिविल सर्जन की तबीयत बिगड़ने और उन्हें हार्ट अटैक का दौरा पड़ने पर भी सदर अस्पताल में वेंटिलेटर चालू नहीं हो सका था, जिसके बाद उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी थी। स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी होने के बाद अब नये सिविल सर्जन डॉ. एन.के. चौधरी ने बंद पड़े वेंटिलेटर को दोबारा चालू कराने की पहल शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही वेंटिलेटर को फंक्शनल किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों को यहीं इलाज मिल सके। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि डॉ. राजू चौधरी के निर्देशन में वेंटिलेटर को फंक्शनिंग किया जा रहा है। वर्तमान में सदर अस्पताल में 6 वेंटिलेटर है, जो बंद पड़े है। कुल मिलाकर, समस्तीपुर सदर अस्पताल में हो रहे इन बदलावों से मरीजों और उनके परिजनों में राहत की उम्मीद जगी है। यदि इसी तरह सुधार की रफ्तार बनी रही, तो आने वाले दिनों में सदर अस्पताल एक बार फिर जिले का भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र बन सकता है। हालांकि अभी भी बहुत ऐसे काम है, जिसे पटरी पर लाना स्वास्थ्य विभाग के लिये चुनौती होगा।
सिविल सर्जन डॉ. निर्मल कुमार चौधरी ने बताया कि डॉ. राजू चौधरी के निर्देशन में सदर अस्पताल में वेंटिलेटर को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही वेंटिलेटर टेक्नीशियन की मांग भी विभाग से की गई है। तब तक डॉ. राजू चौधरी स्वयं वेंटिलेटर संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे और अन्य चिकित्सकों को भी इसका प्रशिक्षण देंगे। कुल मिलाकर, सदर अस्पताल में हो रहे इन सकारात्मक बदलावों से मरीजों और उनके परिजनों में राहत की उम्मीद जगी है। सिविल सर्जन ने बताया कि तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर बंद पड़े वेंटिलेटर को जल्द ही फंक्शनल किया जाएगा। वर्तमान में सदर अस्पताल में कुल छह वेंटिलेटर हैं, जो लंबे समय से बंद पड़े हैं।
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