समस्तीपुर में बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 31.74 लाख की साइबर ठगी; बैंक मैनेजर की तत्परता से बचा रकम, किया गया फ्रिज

समस्तीपुर : डिजिटल अरेस्टिंग के नाम पर 31 लाख 74 हजार रुपये की साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग, क्राइम ब्रांच और जांच अधिकारी बताकर केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वरिष्ठ लिपिक 61 वर्षीय अरूण कुमार से मनी लॉन्ड्रिंग और आइडेंटिटी थेफ्ट केस में फंसाने की धमकी देते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया और दबाव बनाकर 31.74 लाख की ठगी कर ली। हालांकि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा परिसर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर अमित गुंजन ने सतर्कता बरतते हुए साइबर ठगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया व साइबर पुलिस की मदद से पूरी रकम को फ्रीज कर दिया।
इस संबंध में पूसा थाना क्षेत्र के महमदपुर देवपार टीचर्स कॉलोनी के रहने वाले पीड़ित अरुण कुमार ने मामले को लेकर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है। पीड़ित ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 12 जनवरी की सुबह उनके मोबाइल पर 9453463230 नंबर से एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने कहा कि उनके आधार से एक नया सिम रजिस्टर हुआ है और उससे हरासिंग मैसेज व अवैध विज्ञापन भेजे जा रहे हैं। इसके बाद कॉल को कथित डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जोड़ते हुए उन्हें डराया गया।

पीड़ित ने बताया कि ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई का सब-इंस्पेक्टर और फिर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर बताते हुए व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर धमकाया। साइबर ठगों ने बताया कि उनके खिलाफ आइडेंटिटी थेफ्ट और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है, यहां तक कि केनरा बैंक, मुंबई में खाता खोलकर एटीएम कार्ड गायब होने की कहानी सुनाई गई। ठगों ने बुजुर्ग पीड़ित को उम्र का हवाला देते हुए डिजिटली अरेस्टिंग करने की बात कहकर डर का माहौल बनाया और आदेश न मानने पर समस्तीपुर आकर गिरफ्तार करने की धमकी दी।

इस दौरान पीड़ित से एफडी, एटीएम, आधार और शपथपत्र की फोटो मंगवाई गई। इस दौरान उन्हें एक कमरे में ही रहने और लगातार आनलाईन रहकर पुलिस की निगरानी में ही रहने को कहा गया।बाद में कथित कोर्ट ऑर्डर और आरबीआई जांच का हवाला देकर आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते में आरटीजीएस के जरिए 31.74 लाख रकम ट्रांसफर कराई गई। इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर होने पर बैंक के मैनेजर को संदेह हुआ तो उन्होंने खाता धारक अरूण कुमार से फोनकर पूछताछ की। पूछताछ के क्रम में पीड़ित ने खुद के डिजिटल अरेस्टिंग की बात बतायी। इसके बाद बैंक के मैनेजर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस की मदद से ट्रांसफर हुए रकम को फ्रिज करा दिया। रकम फ्रिज होते ही राशि सुरक्षित बच गयी, अब इसे साइबर फ्रॉड नहीं निकाल सकते हैं। इसके बाद गुरूवार को पीड़ित ने प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर साइबर थाने में आवेदन दिया है।

आवेदन के आलोक में साइबर पुलिस ने 3/26 कांड संख्या दर्ज कर अनुसंधान में जुट गयी है। इधर साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक पुरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। डीएसपी का बताना है कि यह डिजिटल अरेस्टिंग का क्लासिक मामला है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों के नाम पर डराकर पैसे ऐंठते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है की कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या व्हाट्सऐप पर गिरफ्तारी या पैसे ट्रांसफर का आदेश नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें और 1930 या साइबर क्राइम के बेवसाइट पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावे आधार, बैंक, ओटीपी या दस्तावेज किसी को शेयर न करें।




