समस्तीपुर : सदर अस्पताल में मरीजों को निजी क्लीनिक भेजने वाले दलालों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। प्रसव कराने पहुंचने वाली महिलाएं इनके मुख्य निशाने पर रहती हैं। कुछ आशा कार्ययकर्ताओं, एंबुलेंस कर्मियों और अस्पताल के कुछ कर्मियों पर भी इन बिचौलियों के साथ मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। वहीं सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात कुछ कर्मी खुद दलालों के संपर्क में रहते हैं और मरीजों को बिना उचित इलाज के निजी क्लीनिकों में भेज देते हैं।
कई बार तो मरीजों को डॉक्टर के पास जाने तक का मौका नहीं मिलता और एंबुलेंस में ही सीधे क्लीनिक भेज दिया जाता है। जिले में अवैध जांच घरों, अल्ट्रासाउंड केंद्रों व नर्सिंग होम की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
जिले में कई नर्सिंग होम बिना एमबीबीएस डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं, जहां पारा मेडिकल कर्मी मरीजों का इलाज और यहां तक कि ऑपरेशन तक कर रहे हैं। गलत इलाज की वजह से कई मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकार की सख्त हिदायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे संचालकों में भय नहीं है। सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि जिले भर में सिर्फ 136 अस्पताल ही रजिस्टर्ड है। अब सवाल है की जिले भर मे संचालित हजारों नर्सिंग होम व अस्पतालों को किसका संरक्षण प्राप्त है। स्वास्थ्य विभाग भी कारवाई के नाम पर बस खानापूर्ति करने में लगा है।
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