समस्तीपुर : आम लोगों की सुरक्षा को लेकर हमेशा तत्पर रहने वाली पुलिस पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। ऐसी घटनाओं को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस टीम पर हो रहे जानलेवा हमले न केवल पुलिस बल के मनोबल को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम जनता का विश्वास भी डगमगा देते हैं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस टीम पर हमलों की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा हैं।
हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि किसी भी छोटी-बड़ी घटना के बाद आक्रोशित भीड़ मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर हावी हो जाती है। बल की कमी के कारण पुलिसकर्मियों को अक्सर ऐसी स्थिति में खुद को सुरक्षित निकालना भी मुश्किल हो जाता है। किसी भी संवेदनशील परिस्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए जिले की पुलिस को आसपास के कई थानों से अतिरिक्त बल की सहायता लेनी पड़ती है। इससे न केवल प्रतिक्रिया समय प्रभावित होता है बल्कि घटना स्थल पर तनाव भी बढ़ जाता है।
बीते वर्ष के दौरान जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्जन ऐसे मामले हुए है जिनमें पुलिस टीम पर जानलेवा हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों को लेकर पुलिस विभाग चिंतित है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। पुलिस प्रशासन ने हालिया घटनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।
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शनिवार की रात मथुरापुर थाना क्षेत्र के हांसा मोड़ के पास ट्रैक्टर की ठोकर से नाबालिग किशोर की मौत के बाद भी भीड़ आक्रोशित हो गयी और पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने पुलिस जीप को भी क्षतिग्रस्त कर दिया व डायल-112 पर तैनात दरोगा का सरकारी पिस्टल भी छिनकर गायब कर दिया। पिस्टल बरामदगी को लेकर पुलिस लगातार छापेमारी में जुटी हुई है।
इधर आक्रोशित लोग जब ईंट-पत्थर चलाने लगे तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग भी होने की बात सामने आ रही है। इस दौरान आसपास के कई थानों की पुलिस को भी मोर्चा संभालने के लिये आना पड़ा। वहीं इसके अलावे इसी हफ्ते 17 नवंबर की रात मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के मोरवा रायटोला में एक वारंटी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। इस हमले में एक पुलिस अधिकारी समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
वारिसनगर थाना क्षेत्र में भी इसी वर्ष थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस कर्मियों पर जानलेवा हमला हो चुका है। वहीं रोसड़ा के बैजनाथपुर गांव में बैंक लूट की साजिश में जुटे अपराधियों ने छापेमारी करने पहुंची डीआईयू टीम पर फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने एक अपराधी को दबोच लिया, जबकि अन्य फरार हो गए थे। गिरफ्तार आरोपी के पास से हथियार और मादक पदार्थ बरामद हुआ था। फायरिंग की दूसरी बड़ी घटना डीआईयू टीम पर 20 अगस्त को सोमनाहा गांव में हुई, जहां गुप्त सूचना पर पहुंची पुलिस पर अपराधियों ने तीन राउंड गोली चलाई।
पुलिस ने जवाबी फायरिंग करते हुए एक अपराधी को गिरफ्तार कर लिया था। उससे एक पिस्टल, सात जिंदा कारतूस और दो मैगजीन बरामद किए गए थे। इसी तरह अक्टूबर में भी हलई थाना क्षेत्र के दरबा पंचायत में एक आरोपी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में एसआई नितुन कुमार, एसआई सुजीत कुमार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने न केवल गिरफ्तार आरोपी को छुड़ा लिया, बल्कि पुलिसकर्मियों से हथियार छीनने का भी प्रयास किया। वहीं मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कोरबद्दा में भी 22 जून को पुलिस जीप पर हमला हुआ था। पुलिस टीम पर हो रहे हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
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