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इलाज का पैसा जमा नहीं करने पर बंधक बने मरीज को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समस्तीपुर पुलिस की मदद से कराया मुक्त

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समस्तीपुर/खानपुर : स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार को स्थानीय पुलिस के सहयोग से प्रखंड के शोभन पंचायत के बड़गांव में अवैध रुप से संचालित नारायण सेवा सदन (निजी क्लिनिक) में छापेमारी कर एक मरीज को धंधेबाजों के चंगुल से मुक्त कराया। इस बाबत बसंतपुर गांव निवासी राहुल कुमार झा ने स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से लिखित शिकायत की थी।

शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से इलाके में अवैध रुप से निजी क्लिनिक संचालित करने वाले धंधेबाजों के बीच हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार शोभन पंचायत में सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए परिजनों ने बड़गांव स्थित नारायण सेवा सदन (निजी क्लिनिक) में शुक्रवार को भर्ती कराया गया था। जहां चिकित्सक के द्वारा मरीज के इलाज के नाम पर परिजनों से मोटी रकम मांगी जा रही थी।

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इलाज के रकम जमा नहीं करने पर मरीज को बंधक बना रखा था। परिजनों ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग से इसकी शिकायत की। छापेमारी दल में स्वास्थ्य विभाग की टीम का नेतृत्व कर रहे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राणा नितीश कुमार सिंह ने बताया कि शोभन पंचायत के व्यक्ति द्वारा सूचना दी गई कि उनके मरीज को नारायण सेवा सदन ( निजी क्लिनिक) में बंधक बना कर रखा है।

निजी क्लिनिक के संचालक के द्वारा मरीज के इलाज के नाम पर पहले 20 हजार रुपये की डिमांड की गयी थी, इसमें एडवांस के तौर पर 6 हजार रुपये परिजनों से जमा कर लिया था। बाकी रुपये जमा नहीं करने पर मरीज को बंधक बना रखा था। जब मरीज के परिजन ने भारी भरकम रकम के बदले डॉक्टर से पुर्जा पर उन्हें दी गई सारी दावों के नाम लिखने को कहा तो डॉक्टर के द्वारा 21 नवंबर की तिथि में आरजू सेवा संस्थान ताजपुर के नाम के निजी क्लीनिक के पुर्जा पर सदर अस्पताल रेफर किया गया।

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मामला संज्ञान में आने के बाद शनिवार को जब स्वास्थ्य विभाग के टीम ने छापा मारा तब उक्त मरीज का रेफर वाला पर्चा मरीज के परिजन को दिया गया। लेकिन पर्चा पर न तो किसी दवा का नाम था और ना ही इलाज का जिक्र। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीज को बंधक से मुक्त कराया और सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा है, संबंधित अस्पताल का किसी भी तरह का कोई निबंधन नहीं है, पीड़ित मरीज के परिजन द्वारा लिखित शिकायत करने पर विधि सम्मत अग्रत्तर कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी दल में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य प्रबंधक राकेश रंजन, स्थानीय पुलिस थाना के हिमांशु कुमार आदि शामिल थे।

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