समस्तीपुर : समस्तीपुर सदर अस्पताल की हालत इन दिनों सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद यहां मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को हर दिन कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसे लेकर करीब तीन माह पूर्व भी इस मुद्दा को उठाया गया था।
अधिकारियों ने जल्द ही इन समस्याओं के निदान की बात कही थी। बावजूद जो समस्याएं थी उसका दस फीसदी निदान भी नहीं हो सका। आंकड़े बताते हैं कि सदर अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन सुविधा के अभाव में अधिकतर को निराश लौटना पड़ता है।
अस्पताल आने वाले लोगों को अब बीमारियों से निजात नहीं, बल्कि संक्रमण के खतरे से डर लगा रहता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचीं फातमा तबसूम ने कहा कि सदर अस्पताल में इस समय केवल सामान्य पुरुष और महिला ओपीडी और इमरजेंसी विभाग ही नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। हड्डी रोग, दंत चिकित्सा और सर्जन ओपीडी या तो साप्ताहिक रूप से चल रहे हैं या बिल्कुल भी नहीं।
हड्डी ओपीडी सप्ताह में दो दिन किसी तरह संचालित होता है, जबकि दंत और सर्जन ओपीडी की स्थिति बेहद खराब है। इन विभागों में प्रतिदिन मरीज आते हैं, लेकिन चिकित्सकों की नहीं रहने के कारण उन्हें बिना इलाज के लौटना पड़ता है। मंजू कुमारी कहती है कि महिला ओपीडी की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। महिला चिकित्सक प्राय: 11 बजे के बाद आती हैं और 1-2 घंटे में ही ओपीडी छोड़ देती हैं। ऐसे में सैकड़ों महिलाएं लंबी प्रतीक्षा के बावजूद बिना इलाज के लौट जाती हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
लोगों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अबतक सदर अस्पताल में बेहतर सुविधा में बच्चों के लिए अलग से ओपीडी शुरू नहीं की गई है। गंभीर बच्चों के लिए नवजात देखभाल केंद्र (एसएनसीयू) मौजूद है, लेकिन सामान्य बीमार बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। पूजा कुमारी, ललिता देवी कहतीं है कि अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित इन मरीजों की पीड़ा तब और बढ़ जाती है, जब उन्हें जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। लंबी लाइन में लगकर पर्ची कटवाने और फिर ओपीडी के बाहर बैठकर अपनी बारी आने को घंटों इंतजार करना होता है।
यदि डॉक्टर ने देखने और दवा लिखने के साथ कुछ जांच लिख दी तो इनकी समस्या काफी बढ़ जाती है। जांच के लिए मरीजों को अगले दिन फिर आना पड़ता है। दवा लेने के लिए भी उन्हें लोगों की लंबी कतार में खड़ा होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार दवा मिल जाती है तो कई बार उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। अस्पताल आये रौशन आरा, कनिज फायरा, प्रतिभा देवी आदि का कहना है कि यहां सबसे अधिक सामान्य, प्रसूती, बच्चा व आंख विभाग में भीड़ होती है।
नये एमसीएच बिल्डिंग के उद्घाटन होने के बाद जगह बचने पर दवा काउंटर को वहीं शिफ्ट किया जाएगा। अस्पताल में लगभग सभी दवाओं का स्टॉक है। वहीं साफ-सफाई को लेकर विशेष ख्याल रखा जा रहा है। अगर कर्मी की लापरवाही से वार्ड में बेड शीट चेंज नहीं किया जा रहा है तो उसपर कारवाई की जाएगी।
-डॉ. गिरीश, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल समस्तीपुर
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