Samastipur

कल्याणपुर सीट से महेश्वर हजारी के सामने जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती, समस्तीपुर के इस सीट पर महागठबंधन भी तैयार

बागमती और गंडक नदी की बाढ़ से हर साल जूझने वाले समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र (सुरक्षित) की सियासी धारा लंबे समय से स्थिर है। यह बिहार की उन चुनिंदा सीटों में से है, जहां अबतक छह बार जदयू (समता पार्टी को मिलाकर) जीत चुका है। डेढ़ दशक से इस सीट पर जदयू का कब्जा है। कल्याणपुर के वर्तमान विधायक महेश्वर हजारी सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री हैं। यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी और 2005 के चुनाव तक सामान्य श्रेणी की रही। पर 2008 के परिसीमन में इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।

कल्याणपुर का सियासी मैदान शुरू से ही समाजवादी धारा के दलों के लिए मुफीद रहा है। यहां से 16 चुनावों में सिर्फ 3 बार कांग्रेस को सफलता मिली। आरक्षित क्षेत्र घोषित होने के बाद यहां से जदयू की ही जीत होती रही है। इस दौरान तीन विधानसभा चुनावों (2010, 2015 व 2020) में यहां से तीन अलग-अलग चेहरों ने जीत दर्ज की। तीनों एक ही राजनीतिक परिवार के। 2010 में जदयू के टिकट पर रामसेवक हजारी जीते। 2012 में रामसेवक हजारी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में मंजू कुमारी विजय हुईं। 2015 और 2020 में रामसेवक हजारी के पुत्र महेश्वर हजारी यहां से जीते।

कल्याणपुर में 21%अनुसूचित जाति के मतदाता हैं, जबकि मुस्लिम मतदाता करीब 10 % हैं। ओबीसी व अगड़ी जातियों के मतदाता भी अच्छी-खासी संख्या में हैं। क्षेत्र की आधी आबादी भी संजीदा हैं। यहां से 4 महिलाएं 5 बार जीत दर्ज कर चुकी हैं। इस बार महेश्वर हजारी जीत की हैट्रिक लगाने की मशक्कत कर रहे हैं। पिछले चुनाव में महागठबंधन ने यह सीट भाकपा (माले) के लिए छोड़ी थी। इसके पहले के दो चुनावों (2010 व 2015) में महेश्वर हजारी के सामने मुख्य प्रतिद्वंद्वी लोजपा थी। अब लोजपा(रामविलास) एनडीए का घटक दल है। इससे एनडीए का कुनबा बढ़ा है। महागठबंधन जदयू को घेरने को सामाजिक समीकरण साधने में जुटा है। उधर, जनसुराज ने स्थानीय मुद्दों के आधार पर लोगों को गोलबंद करना शुरू किया है। यहां प्रशांत किशोर सभा कर चकुे हैं।

स्थानीय विधायक सह सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री, महेश्वर हजारी का कहना है कि कल्याणपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विकास के काफी काम हुए हैं। सड़क और पुल-पुलियों का जाल बिछा है। लंबी दूरी की सर्वाधिक आठ सड़कें बन रही हैं। कलौंजर और नामापुर क्षेत्र में भी विकास के कई काम हुए हैं। तीन नए बड़े पुलों का निर्माण हुआ। कल्याणपुर में जल्द उच्चतर शिक्षा की व्यवस्था शुरू कराई जाएगी। शेष बचे कार्यों को आगे पूरा करूंगा।

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पूर्व प्रत्याशी, कल्याणपुर विधानसभा, रंजीत राम का कहना है कि पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के लिए उचित प्रयास नहीं किए गए। महादलित टोलों में सड़क नहीं बनी है। बाढ़ का स्थायी निदान और कटाव रोकने को कोई उपाय नहीं हुआ। जलनिकासी व सिंचाई के लिए कुछ नहीं किया गया। नये उद्योग की स्थापना नहीं की गई। बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीण सड़कों को मुख्य सड़क से नहीं जोड़ा गया है।

कृषि विश्वविद्यालय से क्षेत्र की पहचान :

उत्तर बिहार का इकलौता जूट मिल व डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि इसी क्षेत्र में हैं। कृषि अनुसंधान को लेकर विवि की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है।

पिछले चुनाव में मुद्दे :

● हर वर्ष नामापुर और कलौंजर बाढ़ में डूब जाते हैं। कटाव का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

● युवाओं के लिए स्टेडियम का निर्माण नहीं हुआ।

● किसी भी नये उद्योग की स्थापना नहीं हुई।

● जूट मिल के जीर्णोद्धार के लिए पहल नहीं हुई।

साल : प्रत्याशी और पार्टी
  • 1967 : ब्रह्मदेव नारायण सिंह, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
  • 1969 : ब्रह्मदेव नारायण सिंह, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
  • 1972 : राम नरेश त्रिवेदी, कांग्रेस
  • 1977 : बशिष्ठ नारायण सिंह, जनता पार्टी
  • 1980 : सुकुमारी देवी, कांग्रेस
  • 1985 : बशिष्ठ नारायण सिंह, लोकदल
  • 1990 : दिलीप कुमार राय, कांग्रेस
  • 1995 : सीता सिन्हा, जनता दल
  • 2000 : अश्वमेध देवी, समता पार्टी
  • 2005 (फरवरी): अशोक प्रसाद वर्मा, राजद
  • 2005 (अक्टूबर): अश्वमेध देवी, जदयू
  • 2009 : अशोक प्रसाद वर्मा, राजद
  • 2010 : रामसेवक हजारी, जदयू
  • 2012 : मंजू कुमारी, जदयू
  • 2015 : महेश्वर हजारी, जदयू
  • 2020 : महेश्वर हजारी, जदयू

पांच साल में दिखे ये बदलाव :

● सड़क और पुल-पुलियों का निर्माण हुआ।

● आमस-दरभंगा एक्सप्रेस वे से कई पंचायतों को होगा फायदा।

● सरकारी योजनाएं सुदुर गांवों तक पहुंचीं।

● तीन नए बड़े पुलों का निर्माण हो रहा है।

बाढ़ और कटाव क्षेत्र की बड़ी समस्या :

विस क्षेत्र में कल्याणपुर व पूसा दो प्रखंड हैं। यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है। इसके दक्षिण में बूढ़ी गंडक, तो उत्तर में बागमती नदी है। हर साल बड़ी आबादी बाढ़-कटाव से जूझती है। कल्याणपुर, चकमेहसी व पूसा ज्प्राा दयभावित हैं। पांच वर्षों में 300 से अधिक घर और 500 एकड़ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलियों का निर्माण हुआ है। रोजगार के लिए पलायन इस बार चुनाव में बड़ा मुद्दा है।

Avinash Roy

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