दिव्यांग होने के बावजूद शिक्षा की अलख जगा रहे चैता गांव के अर्जुन दास, समाजसेवी राजू सहनी ने किया सम्मानित

समस्तीपुर : अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ते की दीवार नहीं बन सकती। उजियारपुर प्रखंड के अंगारघाट थाना क्षेत्र के चैता गांव निवासी दिव्यांग अर्जुन दास इसकी मिसाल हैं। मात्र 2 फीट लंबाई और बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प और मेहनत के बल पर गांव के सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने का बीड़ा उठाया है।
अर्जुन दास ने अपनी दिव्यांगता को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। ग्रेजुएशन तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे गांव में ही रहकर निःशुल्क ट्यूशन देने लगे। धीरे-धीरे उनके शिक्षण केंद्र में बच्चों की संख्या बढ़ती गई। आज स्थिति यह है कि उन्हें दो शिफ्टों में बच्चों को पढ़ाना पड़ता है। शिक्षा के इस पुनीत कार्य के लिए वे कोई शुल्क नहीं लेते, हालांकि कुछ बच्चे अपनी इच्छा से 25-50 रुपये दे जाते हैं जिससे उनका दैनिक खर्च चल जाता है।

उनकी इस निःस्वार्थ सेवा की जानकारी मिलने पर जिले के चर्चित समाजसेवी राजू सहनी ने अर्जुन दास के आवास सह शिक्षण केंद्र का दौरा किया। उन्होंने न केवल अर्जुन दास को सम्मानित किया, बल्कि वहां पढ़ने वाले बच्चों के बीच कॉपी, कलम व पेंसिल का भी वितरण किया। राजू साहनी ने कहा कि अर्जुन दास उन तमाम दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रेरणा हैं जो जीवन से हार मान लेते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी वे अर्जुन दास और उनके शिक्षण केंद्र की हरसंभव मदद करेंगे।

इस मौके पर स्थानीय सरपंच पति जयराम साहनी, चंद्रकांत सिंह, सुखलाल सहनी, रत्नेश राय, श्रीराम साहनी, प्रमोद राय, सुजीत कुमार, वरुण राय, सियाराम राम राय सहित दर्जनों ग्रामीण और छात्र उपस्थित थे। अर्जुन दास ने बताया कि स्कूल जाने के शुरुआती दिनों में लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे अपने आत्मबल और समर्पण के बल पर समाज में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। उनकी यह यात्रा हमें यह सिखाती है कि अगर नीयत नेक हो और इरादे मजबूत, तो कोई भी कमी आपको अपने लक्ष्य से नहीं रोक सकती।





