Samastipur

बेहतर प्रशिक्षण व सुविधा मिले तो समस्तीपुर से भी निकलेंगे राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर

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समस्तीपुर [अविनाश कुमार राय] :- समस्तीपुर जिला खेल और खिलाड़ियों की अनदेखी का गवाह बन रहा है। खासकर फुटबॉल के क्षेत्र में बच्चों और युवाओं की बढ़ती रुचि के बावजूद, मैदान और खेल सामग्री की कमी खिलाड़ियों के सपने पूरे नहीं होने दे रही। जिला प्रशासन और सरकार की उदासीनता ने समस्तीपुर के खिलाड़ियों को हतोत्साहित कर दिया है। समस्तीपुर के राहुल कुमार नेशनल लेवल पर खेल चुके है। राष्ट्रीय स्तर पर अंडर-19, अंडर-17 व अंडर-14 भी खेल चुके है। सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण जीविकोपार्जन के लिए काशीपुर चौक पर जेनरल स्टोर की दुकान चलाने को मजबूर है।

प्रशासन, जनप्रतिनिधि और खेल विभाग से सहयोग मिले तो इन खिलाड़ियों का भविष्य चमक सकता है। Samastipur Town Media के साथ संवाद के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी समस्या बताई। समस्तीपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों को खेल सामग्री फुटबॉल, ड्रेस और मैदान की कमी है। इन बुनियादी संसाधनों के अभाव में न केवल उनके प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि उनकी प्रतिभा भी निखर नहीं पा रही। आज बच्चे डिजिटल उपकरणों और वर्चुअल गेम्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कई मामलों में खतरनाक भी साबित हो रहे हैं। ऐसे में मैदानी खेलों का महत्व और भी बढ़ जाता है। फुटबॉल का खेल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टीम भावना, अनुशासन और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करता है।

स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाओं के अभाव से बच्चों और युवाओं का उत्साह कम हो जाता है, जिससे वे खेलों से दूर होने लगते हैं। समस्तीपुर में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकते हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा और अवसर देने की जरूरत है। खेल मैदानों का विकास, गुणवत्तापूर्ण सामग्री की उपलब्धता और कोचिंग की सुविधा में सुधार करके बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन, खेल संघों और समुदाय को मिलकर इस दिशा में प्रयास करना चाहिए।

खेल सामग्री और मैदान की कमी से खिलाड़ियों की मुश्किलें बढ़ीं :

समस्तीपुर पटेल मैदान में स्कूल आफ साॅकर नामक फुटबॉल ट्रेनिंग चलाने वाले रंजन गांधी ने बताया कि स्थानीय खिलाड़ी इस समय गहरे संकट का सामना कर रही हैं। पूरे जिले में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए खेलने योग्य मैदानों की भारी कमी है। समस्तीपुर में एकमात्र पटेल मैदान है। यहां विभिन्न खेलों का अभ्यास और आयोजन होता है। लेकिन इस स्टेडियम की स्थिति भी दयनीय है। स्टेडियम में घास की कमी के कारण, बच्चे गिरते और चोटिल होते हैं। मैदान की साफ-सफाई और रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। चेंजिंग रूम को लेकर लड़कियों को काफी समस्या होती है। यहां तक कि एक वॉशरूम भी मैदान में नहीं है। मैदान के मुख्यद्वार के बगल में गंदगी है। मैदान में कई जगह गड्ढे है। खिलाड़ियों ने बताया कि कई बार विषैले सांप निकल आते हैं। जान का भी खतरा बना रहता है।

प्रैक्टिस व टूर्नामेंट का अभाव :

फुटबॉल खिलाड़ी राज नंदनी ने बताया कि समस्तीपुर में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए नियमित टूर्नामेंट आयोजित नहीं होते। जिला प्रशासन का रवैया इतना उदासीन है कि अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों को पूरा मैदान तक उपलब्ध नहीं कराया जाता। इससे उनका विधिवत प्रशिक्षण बाधित होता है। स्टेडियम में सुविधाओं की कमी है। इंद्रा स्टेडियम का हाल भी निराशाजनक है। यहां लड़कियों के लिए चेंजिंग रूम की सुविधा तक नहीं है। स्टेडियम में शुद्ध पेयजल का भी अभाव है। खिलाड़ियों के अभ्यास के दौरान कई बार रोशनी की कमी परेशानी बढ़ा देती है। इधर पटेल मैदान में जिला प्रशासन द्वारा स्टेडियम में नियमित तौर पर अन्य प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के कारण खिलाड़ी अभ्यास सत्र से वंचित रह जाते हैं। एकमात्र स्टेडियम में प्रशासन का यह रवैया खिलाड़ियों के लिए और अधिक समस्याएं पैदा करता है।

नहीं है कोई योजना, खेल कोटे से वैकेंसी नहीं :

रानी कुमारी ने बताया कि फुटबॉल खिलाड़ियों को किसी भी तरह का सरकारी सहयोग नहीं मिलता है। न ही उनके लिए मैदान उपलब्ध कराए जाते हैं और ना ही खेल सामग्री। खिलाड़ियों को अपने खर्च पर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं, जो हर किसी के लिए संभव नहीं होता। फुटबॉल जैसे खेल में शारीरिक ऊर्जा और फिटनेस का होना अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय स्तर पर डाइट सपोर्ट और पोषण से संबंधित कोई योजना नहीं है। कई सालों से खेल कोटे में सरकारी वैकेंसी भी नहीं निकलती है।

प्रोत्साहन की आवश्यकता :

प्रशिक्षक रंजन गांधी ने बताया कि फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक प्रशासनिक स्तर पर कई प्रयास किए जा सकते हैं। नियमित टूर्नामेंट आयोजित करना, खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए कोचिंग सत्र आयोजित करना और डाइट सपोर्ट प्रदान करना जरूरी है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार और स्थानीय संगठनों को कदम उठाने चाहिए। फुटबॉल कोच ने बताया कि जिले में एकमात्र पटेल मैदान पर निर्भरता खत्म करने के लिए वैकल्पिक मैदानों की व्यवस्था करना जरूरी है। साथ ही रख रखाव और इसमें मूलभूत सुविधाएं जैसे घास, लाइट, पेयजल और चेंजिंग रूम की व्यवस्था करनी चाहिए। समस्तीपुर के खिलाड़ी सरकार और समाज से सहयोग की अपील कर रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर उन्हें उचित संसाधन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले, तो वे जिले और राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकते हैं।

शिकायतें :

1. फुटबॉल खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त मैदान और खेल सामग्री नहीं मिलती।

2. पटेल मैदान की दयनीय स्थिति है। स्टेडियम में घास, रोशनी, सफाई और रख रखाव का अभाव है।

3. खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार का सरकारी सहयोग नहीं मिलता है। सरकारी सहयोग की कमी है।

4. स्वास्थ्य और पोषण का अभाव और सही डाइट न मिलने के कारण कई खिलाड़ी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

5. अन्य कार्यक्रमों से अभ्यास में बाधा होती है। स्टेडियम में अन्य आयोजनों के कारण खिलाड़ियों की प्रैक्टिस प्रभावित होती है।

सुझाव :

1. अतिरिक्त मैदानों का विकास करें। आधुनिक स्टेडियम बनाए जाए और दुधपुरा हवाई अड्डा फील्ड और हाउसिंग बोर्ड मैदान को छोटे खेल केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

2. खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं हों। पटेल मैदान में घास, शुद्ध पेयजल और चेंजिंग रूम जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहाल किए जाए। खराब लाइटों को ठीक कराया जाए।

3. जिले में फुटबॉल को प्रोत्साहन देने के लिए नियमित टूर्नामेंट और प्रतियोगिताओं का आयोजन हो।

4. फुटबॉल खिलाड़ी के लिए आवश्यक पोषण और डाइट सपोर्ट की योजनाएं लागू की जाएं।

5. खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग और प्रशिक्षण के लिए नियमित सत्र आयोजित किए जाएं।

Avinash Roy

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