Samastipur

समस्तीपुर जिले में मत्स्य बाजार की होगी शुरुआत, प्रथम चरण के लिये जिले के इन प्रखंडों को किया गया चिन्हित

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समस्तीपुर : जिला मत्स्यकी पदाधिकारी मो. नियाजुद्दीन ने कहा कि समस्तीपुर में जल्द ही हाईटेक मत्स्य बाजार की शुरूआत होगी। प्रथम चरण में जिले के सिंघिया, रोसड़ा, शिवाजीनगर एवं खानपुर प्रखंड को चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही मत्स्य से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है। इसमें फिश प्रोसेसिंग यूनिट, ऑरनामेंटल फिश, फिश ड्रायर, फिश आहार जैसे कार्यों को अपनाकर लोग आर्थिक रूप से सबल हो सकते हैं।

जरूरत है विश्वविद्यालय से तकनीकी ज्ञान लेकर सरकार की योजनाओं की योजनाओं को शत-प्रतिशत सफल बनाने की। वे मंगलवार को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पंचतंत्र सभागार में बोल रहे थे। मौका था बेहतर उत्पादन के लिए समेकित मत्स्य पालन विषय पर छह दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र का। उन्होंने कहा कि मछली से जुड़े रोजगार की लगातार बढ़ रही मांग से अब यह उद्योग का रूप ले चुका है। उन्होंने इसके उत्पादन के लिए अनुपयोगी भूमि का भी इस्तेमाल करने पर बल दिया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ.मयंक राय ने कहा कि मछली उत्पादन के क्षेत्र में बिहार आत्मनिर्भर होने की स्थिति है। अब इसे निर्यातक राज्य के रूप में बढ़ावा देने की जरूरत है। इसमें केन्द्र व राज्य सरकार हरसंभव सहयोग में जुटी है। तो दूसरी ओर विवि तकनीकी व व्यवसायिक ज्ञान से सशक्त कर रहा है।

उन्होंन कहा कि मछली उत्पादन के अलावा उसका बीज समेत अन्य उत्पाद का निर्माण कर बाजार से जुड़कर लोग लाभ कमा सकते हैं। मौके पर वैज्ञानिक पवन शर्मा ने भी संबोधित किया। स्वागत डॉ.फूलचंद एवं संचालन प्रशिक्षण संयोजिका डॉ.विनिता छत्रपति ने किया।

मछली पालन से होंगे आत्मनिर्भर: डीन

डॉ.राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मत्स्यकी महाविद्यालय, ढोली में मंगलवार को मत्स्य पालन व्यवसाय पर छह दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन कृषि स्नातकोत्तर के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. मयंक राय ने किया। अध्यक्षता महाविद्यालय के डीन डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने किया।

मौके पर डॉ.मयंक राय ने कहा कि मछली पालन व इससे जुड़ा व्यवसाय कर लोग आत्मनिर्भर बन सकते है। इसमें सरकार व विवि हरसंभव सहयोग में जुटा है। उन्होंने कहा कि मछली पालन के अलावा इसका उत्पाद व बीज का निर्माण, ऑरनामेंटल मछली जैसे कई कारोबार को अपनाकर लोग आर्थिक रूप से सबल हो सकते हैं।

महाविद्यालय के डीन डॉ.पीपी श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सरकार व विवि का यह प्रयास स्वाबलंबी बनाने में अहम भूमिका निभायेगा। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को जमीन पर उतारने व अन्य लोगो को प्रेरित करने, समूह बनाकर कार्य करने की अपील की। प्रशिक्षण में मुजफ्फरपुर जिले के चयनित 30 प्रशिक्षणार्थी हिस्सा ले रहे हैं। मौके पर वैज्ञानिक डॉ. शिवेन्द्र कुमार, डॉ.राजीव कुमार ब्रह्मचारी, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. अनिरुद्ध कुमार, डॉ. मोगलेकर एच.एस, डॉ. प्रवेश कुमार, डॉ. सुजीत कुमार नायक, डॉ. तनुश्री घोड़ई, रोशन कुमार राम, विनोद कुमार, साजन कुमार भारती मौजूद थे।

Avinash Roy

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