समस्तीपुर :- स्वास्थ्य विभाग अभी से एईएस (चमकी) से बचाव की तैयारी में जुट गया है। हालांकि, जिले में इस वर्ष अभी तक इससे जुड़ा एक भी मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एईएस जेई का कहर मुख्य रूप से अप्रैल से जुलाई के बीच के महीनों में दिखाई देता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग जिले के शिशु रोग विशेषज्ञों, पारा मेडिकल स्टाफ को एईएस एसओपी की ट्रेनिंग दी गई है।
इस संबंध में डीवीबीडीसी संतोष कुमार ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट लेवल ट्रेनिंग मेडिकल ऑफिसर्स को एईएस जेई ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार, एईएस एसओपी की ट्रेनिंग लेने के बाद संबंधित चिकित्सक और कर्मी अपने केंद्रों में बचाव की ट्रेनिंग देंगे। वहीं, हॉस्पिटल मैनेजर, शिशु रोग विभाग के कर्मी, औषधि विभाग कर्मी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सक्षम कर्मी, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आदि थे।
बच्चों को रात में खाली पेट नहीं सोने देना है। सोने से पहले कुछ मीठा जरूर खिलाना है। रात में सोय अवस्था में बच्चे को हिलडुला कर देखते रहना है। तेज बुखार होने पर ठंडा पानी से शरीर को पोछना है। साथ ही पैरासिटामोल दवा देकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर इलाज कराना है।
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