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राष्ट्रीय कृमि दिवस पर 26 लाख 42 हजार 205 बच्चों को खिलायी जाएगी एल्बेंडाजोल की दवा

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समस्तीपुर : जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर एक से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाया जाएगा। 4 मार्च को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान के तहत जिले के 26 लाख 42 हजार 205 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है। जिले के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाया जाएगा।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम के तहत 19 वर्ष के सभी बच्चो को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। 7 मार्च को मॉपअप राउंड का आयोजन कर छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाया जाएगा। ताकि एक भी बच्चा दवा खाने से वंचित न रहे। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ विशाल कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और बच्चों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखना है।

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स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आईसीडीएस के सहयोग से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवा उपलब्ध कराई जाएगी। छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाने के लिए 7 मार्च को मॉपअप राउंड आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर डीडीसी संदीप शेखर प्रियदर्शी की अध्यक्षता में गुरुवार को समीक्षा बैठक की गई। तैयारियों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि 5-19 वर्ष के बच्चों को विद्यालय में शिक्षक द्वारा दवा खिलाई जाएगा।

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वहीं, एक से पांच वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों आंगनवाड़ी सेविका के द्वारा दवा खिलायी जाएगी। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि आंगनवाड़ी केन्द्र और स्कूल नहीं जाने वाले सभी बच्चो की सूची बनाकर एक प्रति आंगनवाड़ी सेविका को देंगी और कार्यक्रम के दिन मोबिलाइजर के रूप मे कार्य करेंगी। बीमार बच्चों को ठीक होने तक दवा नहीं देना है।

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वहीं, उन्हें खाली पेट भी दवा नहीं खिलाना है। दवा खाने के बाद किसी भी तरह का गंभीर साइड इफेक्ट होने की शिकायत नहीं होती है। हालांकि दवा खाने के बाद थोड़ा-बहुत जी मचला सकता है या वोमिटिंग टेंडेंसी आदि की शिकायत हो सकती है। किसी भी तरह की विशेष परेशानी होने पर नजदीक के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क किया जा सकता है।

डीडीसी संदीप शेखर प्रियदर्शी ने अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और आईसीडीएस विभागों के बीच आपसी समन्वय को और मजबूत करने का निर्देश दिया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने कहा कि बच्चों में कृमि संक्रमण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक विकास दर प्रभावित होती है। कृमि संक्रमण से खून की कमी, कुपोषण, थकान, पेट में दर्द और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी समस्याएं हो सकती है। इसके कारण बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि भी प्रभावित होती है। है। कृमिनाशक दवा इन समस्याओं को दूर कर बच्चों को स्वस्थ, ऊर्जावान और अधिक सक्रिय बनाने में मदद करती है।

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