Samastipur

कुव्यवस्था: समस्तीपुर सरकारी बस स्टैंड में लावारिस हालत में पड़े करोड़ों के उपकरण हो रहे बर्बाद

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समस्तीपुर :- समाहरणालय के सामनें स्थित सरकारी बस स्टैंड परिसर में वर्षो से लावारिस हाल में रखे करोडों के कई कीमती सामान सड़ कर बर्बाद हो गए। फिर भी इसकी सुधि न तो नगर परिषद ने कभी ली और ना ही नगर निगम के ध्यान में आया। इन कीमती सामान में सफाई ट्रैक्टर, चलंत शौचालय, पानी आपूर्ति टैंकर, सेफ्टी टैंक, जेनरेटर, ट्राली, पम्पसेट समेत अन्य कई सामान शामिल हैं।

नगर निगम से सेवानिवृत्त हो चुके कई पुराने कर्मियों ने बताया कि मामूली खराबी होने के बाद उक्त सामान की मरम्मत नहीं करा सरकारी बस स्टैंड में ले जाकर छोड़ दिया जाता था। जिसके बाद से उनकी कभी देखभाल ही नगर परिषद से नहीं होती थी। इस वजह से एक जगह ही रखे रखे बर्बाद होते गए।

उक्त कीमती सामान को उक्त स्थल पर छोड़ देने के बाद नगर परिषद में कई नए सामान की खरीद कर ली जाती थी। यह खेल काफी समय तक नगर परिषद में चलता रहा। इसकी वजह थी, नए सामान की मनमाने तरीके से खरीद कर कमीशन की उगाही के साथ खास लोगों को लाभ पहुंचाना। हैरानी की बात यह कि सरकारी संपत्ति रहने के बाद भी इनकी नीलामी कर नीलामी से आने वाली राशि को नगर परिषद या नगर निगम के कोष में जमा करने की भी कभी पहल तक नहीं की गई। और तो और, कई कीमती सामान यहां से गायब होकर कहां चले गए, उनका कोई पता भी नहीं है।

लोगों का यह भी कहना है कि सरकारी बस स्टैंड में रखे हुए चलंत शौचालय सांसद कोटा से खरीद होकर कर नगर परिषद को दिए गए थे। उनका कभी नगर परिषद ने शहर के जरूरतमंद लोगों में उपयोग ही नहीं कराया। शहर में पानी आपूर्ति टैंकर को कागज पर खराब दिखा कर सरकारी बस स्टैंड में रख दिया गया था। उसकी जगह नगर परिषद से एक खास व्यक्ति को अपने टैंकर से पानी आपूर्ति करने का ठेका दे दिया गया था। ज्ञात हो कि नगर परिषद को उत्क्रमित कर नगर निगम बनाया गया। नगर निगम बने हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं। लेकिन इन तीन साल में उसने एक बार भी इसकी खोज खबर नहीं ली।

बाइट :

यह बात सही है कि सरकारी बस स्टैंड में नगर परिषद के कई कीमती सामान रखे रखे बेकार हो गए हैं। उनकी देखभाल करना या नीलामी करना नगर निगम का काम है। कायदे से नगर परिषद के द्वारा ही उनकी नीलामी कर दिया जाना चाहिए था।

-मनोज कुमार गुप्ता, सहायक प्रभारी सफाई निरीक्षक, नगर निगम

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सरकारी बस स्टैंड में रखे गए नगर परिषद के कीमती सामानों को ठीक करा कर उसका उपयोग किया जाना चाहिए था। अगर ठीक होने लायक नहीं था तो उनकी नीलामी कर डिस्पोजल कर देना था। इसके लिए कभी कोई प्रस्ताव नगर परिषद या नगर निगम के बोर्ड में नहीं गया। इस मामले में प्रशासनिक चूक ही कहा जा सकता है।

– प्रेमशंकर प्रसाद, पूर्व सफाई निरीक्षक, नगर परिषद

Avinash Roy

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