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समस्तीपुर अनुमंडल क्षेत्र में बीते 8 महीनों के दौरान 53 हादसा, जिसमें 38 लोगों की हो चुकी है मौ’त

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समस्तीपुर :- समस्तीपुर अनुमंडल क्षेत्र में पिछले आठ महीने में 53 हादसों में 38 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें अधिकांश हादसा रात में नो इंट्री खुलने के बाद हुए है। स्थिति यह है कि रात आठ बजे के बाद जैसे ही नो इंट्री का समय समाप्त होता है, सड़कों पर ट्रकों की तेज रफ्तार शुरू हो जाती थी। बेतरतीब तरीके से ट्रकों के परिचालन से आये दिन बाइक चालक व राहगीर हादसों के शिकार होते रहते हैं।

विदित हो कि रात में आठ बजे के बाद शहरी इलाके से ट्रैफिक पुलिस की भी ड्यूटी समाप्त हो जाती है, जिससे वाहनों की रफ्तार लगाम लगाने के लिए कोई सड़क पर नहीं रहता है। इससे गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रकों का काफिला तेज रफ्तार में एक दूसरे के पपीछे भागता रहता है। जिससे आये दिन मुसरीघरारी से लेकर मथुरापुर थाना यानि बाजार समिति के गेट तक हादसे होते रहते हैं। कभी तो तेज रफ्तार के कारण डिवाइडर भी ट्रक चढ़ जाता है।

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हादसा एक :

गुरुवार की रात मोहनपुर में साइबर कैफे संचालक की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गयी। साइबर कैफे संचालक अमित कुमार अपनी बुलेट से साइबर कैफे बंद कर रात में घर जा रहा था उसी दौरान तेज रफ्तार टश्क ने उसकी बाइक को अपनी चपेट में लेकर ठोकर मार दिया जिससे कैफे संचालक की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।

हादसा दो :

नगर थाना व मथुरापुर थाना के सीमांकन पर बूढ़ी गंडक पुल पर गुरुवार देर शाम ही एक बाइक ट्रक के नीचे आ गयी। बाइक पर सवार दो युवक बाल-बाल बच गए। दोनों युवकों ने बाइक से कूदकर अपनी जान बचायी। हालांकि उनकी बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ट्रक और चालक को पकड़ लिया।

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हादसा तीन :

समस्तीपुर- मुसरीघरारी रोड में विश्वकर्मा चौक के पास बुधवार रात ट्रक की ही चपेट में आने से बाइक सवार एक युववक की मौत हो गयी। रूदौली निवासी किशाोर पोद्दार अपनी बाइक से घर लौट रहा था उसी दौरान हादसे का वह शिकार हुआ।

हादसा चार :

18 अगसत को स्कूटी सवार एक दंपती को ओवरब्रिज पर थानेश्वर मंदिर के किनारे ट्रक ने अपनी चपेट में लेकर ठोकर मार दिया था। जिससे पति की घटनास्थल पर ही मौत हो चुकी थी जबकि जख्मी महिला अब तक अस्पताल में ही इलाजरत है।

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शहर में यातायात थाना, लेकिन संसाधन का घोर अभाव :

विदित हो कि शहर में बढ़ते सड़क हादसों की घटना पर रोक लगाने के लिए सरकार ने यातायात थाना खोलाा। हालांकि अब तक इसकी व्यवस्था सुचारू नहीं हो पायी है। इस ट्रैफिक का प्रभार डीएसपी स्तर के अधिकारी को दिया गया है। वहीं इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को थाना प्रभारी बनाया गया है। लेकिन संसाधन नहीं है। जानकारी के अनुसार, यातायात थाना में 120 पुलिस कर्मियों का पद स्वीकृत है, लेकिन इसके मुकाबले मात्र आठ सिपाही की ही स्थायी रूप से पदस्थापन है।

वहीं होमगार्ड के 29 जवानों की भी यातायात नियंत्रण में ड्यूटी ली जा रही है। बताया गया है कि शहरी क्षेत्र में रात आठ बजे तक और ग्रामीण इलाकों में सात बजे तक ही ट्रैफिक सिपाही की ड्यूटी रहती है। रात में किसी की ड्यूटी नहीं लगती है। इसकी वजह से नो इंट्री में लंबी दूरी के वाहन चालक बेहिसाब तरीके से वाहनों का परिचालन करते हैं। इस संबंध में यातायात निरीक्षक सुनील कांत ने बताया कि यातायात थाना संसाधन के अभाव सेे जूूझ रहा है। यातायात के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए फंड का भी अभाव है।

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