समस्तीपुर/पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित विद्यापति सभागार में किसान दिवस पर राष्ट्रीय मशरूम दिवस का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए डीन पीजीसीए डाॅ मयंक राय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की दौर में संपूर्ण भारत वर्ष के मशरूम उत्पादन को 200 गुना और अधिक बढ़ाने की जरूरत है। जिससे देश ही नहीं विदेशों की मांग पर भी खरा उतरने में मशरूम उत्पादक सक्षम हो सके। बटन मशरूम के अलावा अन्य प्रजातियों के मशरूम का वृहत पैमाने पर उत्पादन करने की आवश्यकता जतायी।
पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए कृषि अवशेषों को मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में लाने पर उत्पादकों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और ज्यादा से लाभ मिलने की संभावना होती है। बेसिक साइंस के डीन डॉ. अमरेश चंद्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले दो वर्षों में मशरूम के क्षेत्र में चार पेटेंट हासिल कर चुका है, जो कि एक रिकॉर्ड है। डीन फिशरीज डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने में डॉ दयाराम का अहम योगदान है। मशरूम की खेती करने वाली रेखा देवी और किसान नरेन्द्र शाही ने अपने अनुभवों को साझा किया।
मशरूम वैज्ञानिक डॉ. दयाराम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में झोपड़ी में मशरूम की खेती सबसे बेहतर है और यह जलवायु अनुकूल भी है। कार्यक्रम के दौरान एसएलएस ट्रस्ट के तत्वावधान में आये उड़ीसा के मशरूम किसानों ने गीत और संगीत प्रस्तुत किया। स्वागत डॉ. आरपी प्रसाद ने प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुधा नंदिनी ने किया। संचालन डॉ. कुमारी अंजनी ने किया। डॉ. शंकर झा, डॉ. आशीष पांडा, डॉ. एसएस प्रसाद, डॉ. कुमार राज्यवर्धन आदि मौजूद थे।
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