समस्तीपुर: प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन

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समस्तीपुर :- गणित एवं विज्ञान विषय शिक्षा को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कक्षा 6ठी से 8वीं की पाठ्य पुस्तकों के पाठ आधारित प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम की शुरुआत 16 जुलाई 2024 को की गई है, जिसमें गणित विषय में कुल 18 प्रोजेक्ट एवं विज्ञान विषय में कुल 24 प्रोजेक्ट से संबंधित एक शिक्षक संदर्शिका को तैयार किया गया है जिसे गणित एवं विज्ञान विषय पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के द्वारा प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग आधारित कक्षाओं का किर्यान्वयन किया जाना है।
जिला स्तर पर प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान मानवेंद्र कुमार राय के निर्देशानुसार सीटीई समस्तीपुर में जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रत्येक प्रखंड से प्रखंड के एक बीआरपी एवं बीपीएम के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उक्त कार्यशाला की शुरुआत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान मानवेंद्र कुमार राय एवं सीटीई के प्राचार्य पवन कुमार सिंह एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षक ऋतु राज जायसवाल, मनीष चन्द्र प्रसाद ने दीप प्रज्वलन के साथ शुरू किया।

उक्त उन्मुखीकरण कार्यशाला में सभी पदाधिकारी को संबोधित करते हुए डीपीओ एसएसए मानवेन्द्र कुमार राय ने कहा चुनौतियों को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ते हुए अपने प्रखंडाधीन विद्यालयों में कक्षा 6, 7 एवं 8 के बच्चों से उनके शिक्षकों द्वारा प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यक्रम का क्रियान्वयन सफलतापूर्वक करने की चुनौती आप सभी को स्वीकार करनी होगी। उन्होंने प्रशिक्षुओं का हौसला अफजाई करते हुए कहा की ” समस्या यह नहीं है कि हल कौन करेगा, समस्या यह है कि पहल कौन करेगा” साथ ही उन्होंने बताया की संसाधन होते नहीं है,बल्कि बनाए जाते हैं।

जिला प्रशिक्षक ऋतु राज जायसवाल एवं मनीष चन्द्र प्रसाद ने प्रशिक्षण देते हुए कहा कि करके सीखने के कौशल को विकसित करें एवं 21वीं सदी में कौशल के 4-सी ( क्रिटीकल थिंकिंग, कोलेबोरेशन, कम्युनिकेशन एवं क्रिएटिविटी) की महत्वपूर्ण आयाम को साझा किया। प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग शिक्षण पाठ योजना एवं संसाधन सामग्रियाँ बनाई गई हैं। प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग शिक्षण पद्धति से विद्यार्थी अपने वास्तविक जीवन से जुड़ी चुनौतियों को पाठ में दिए गए अवधारणाओं और उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग कर उन्हें सुलझाने का प्रयास करते हैं जिससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा।





