समस्तीपुर :- जिले में पंचायत सरकार भवन निर्माण की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जिले में कुल स्वीकृत 186 पंचायतों में से महज 123 पंचायतों में ही पंचायत सरकार भवन बन पाये है। अंचल स्तर से जमीन मुहैया नहीं होने के कारण 63 पंचायतों में भवन नहीं बन पाया है।
अकेले कल्याणपुर प्रखंड के 8 पंचायतों में जमीन उपलब्ध नहीं होने से भवन तैयार नहीं हो सका है। यही स्थिति कमोवेश अन्य प्रखंडों में है। हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि हर पंचायत में पंचायत सरकार काम कर रही है। जमीन के अभाव में भवन निर्माण नहीं होने से पंचायत वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीओ स्तर से जमीन मुहैया कराये जाने की दिशा में सार्थक पहल नहीं की जा रही है। इस कारण से पंचायत की सभी कार्यालयों की शाखा एक भवन के नीचे संचालित किये जाने का सपना साकार नहीं हो रहा है।
पंचायत सरकार का भवन बनाने के लिए 15 से 25 डिसीमिल जमीन की जरूरत होती है। पंचायत विभाग की ओर से सीओ को आदेश देकर जमीन मुहैया कराये जाने की मांग जारी है। पंचायत सरकार भवनों का निर्माण विश्व बैंक, 13वीं वित्त व पंचायत संसाधन केंद्र की राशि से किया जा रहा है। एक भवन निर्माण पर 1.14 करोड़ से लेकर 1.25 करोड़ रुपये तक खर्च होता है।
इस भवन में सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं मसलन शौचालय, पानी, पार्किंग, समेत आधुनिक सुविधाओं में हाइटेक तकनीक वाई फाई, लैपटॉप व अन्य सामग्रियां उपलब्ध करायी जाती है। पंचायत सरकार भवन में पंचायत सचिव का चैंबर व मुखिया के लिए भी अलग व सुसज्जित चैंबर होता है। कार्यपालक सहायकों के बैठने के लिए बड़ा हॉल होता है। इसमें सभाएं आयोजित की जाती है। सभी तरह के प्रमाण पत्र बनाने के लिए अलग अलग काउंटरों का निर्माण कराया जाता है।
पंचायतों में सरकार भवन निर्माण के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को प्रखंड कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाना पड़े। पंचायत स्तर के सभी कार्यों का निपटारा पंचायत स्तर पर ही हो। पेंशन, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ व जानकारी भी लोगों को यहीं दी जा सके। सात निश्चय से संबंधित कार्य व समस्याओं का समाधान किया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण काम सभी तरह की प्रमाणपत्रों का निर्माण यहां होने से पंचायत के लोगों को शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी प्रकार, आवास योजना के लिए आवेदन देना हो या फिर मनरेगा से संबंधित कार्य, सभी काम एक ही छत के नीचे होगा।
पंचायत स्तर पर कार्यालय के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए बीडीओ के साथ ही सीओ व अन्य संबंधित अफसरों को विजिट करना होता है। अगर कोई काम नहीं हो रहा है अथवा कर्मी मनमाना कर रहे होते हैं तो उनलोगों पर नकेल कसी जाती है। उपर्युक्त कार्यों के अतिरिक्त बाढ़ एवं आपदाओं में भी उसका उपयोग किया जा ऐसे भवन के निर्माण से पंचायतों को अपने कार्य संचालन में जन-सामान्य के प्रति उत्तारदायी बनने और कार्यकलापों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सुविधा होती है।
जमीन के आभाव में 63 पंचायत सरकार भवन के निर्माण नहीं शुरू हो सका है। इसको लेकर सभी सीओ को निर्देश दिया गया है। पंचायती राज विभाग व सीओ को आपस में समन्वय स्थापित कर जमीन उपलब्ध कराते हुए अविलंब कार्य शुरू करने को कहा गया है।
– योगेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
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