समस्तीपुर :- लोक आस्था का महापर्व छठ के संपन्न होने के साथ ही मिथिला का प्रसिद्ध लोक पर्व सामा-चकेवा शुरू हो गया। कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलने वाले इस लोक पर्व के दौरान महिलाएं सामा चकेवा की मूर्तियों के साथ सामूहिक रूप से गीत गाती हैं। भाई बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले इस लोक पर्व को लेकर शहरी सहित ग्रामीण इलाकों में काफी उत्साह है।
गुरुवार को सामा-चकेवा की मूर्तियों को खरीदने के लिए दिनभर महिलाएं और लड़कियों की भीड़ बाजार में देखी गई। सामा-चकेवा की मूर्तियां बाजार में 50 से दो सौ रुपये तक खरीदारी हुई। जितवारपुर कुम्हार टोल के मूर्तिकारों के यहां इसे विशेष रूप से बनाया व बेचा जाता है। बताया जाता है कि पूर्णिमा के एक दिन पहले तक बहनें सामां चकेवा खरीदती हैं। इस दौरान यह खेल किसी भी दिन शुरू किया जा सकता है। सामां बहन तो चकेवा है भाई का प्रतीक भाई-बहन की इस परंपरागत प्रेम प्रतीक खेल में सामां बहन व चकेवा भाई का प्रतीक है।
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