त्योहारी सीजन में जब यात्री पहले ही ट्रेनों की भीड़ और भीषण वेटिंग से परेशान हैं, वहीं रेलवे की एक गजब मिसाल सामने आई है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सहरसा जाने वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन (05558) 20 या 30 नहीं, बल्कि पूरे 67 घंटे की भयंकर देरी से खुली। इसने यात्रियों की शामत ही ला दी, किसी की टिकट की वैलिडिटी खत्म, तो कोई ऑफिस-छुट्टी के कैलेंडर के हिसाब से माथा पकड़कर बैठा।
नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) के मुताबिक, यह ट्रेन 6 तारीख की सुबह 7:55 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस से खुलनी थी। लेकिन लिंक रैक उपलब्ध नहीं होने की वजह से वेस्टर्न रेलवे को ट्रेन री-शेड्यूल करनी पड़ी।
रेलवे ने 65 घंटे 05 मिनट का आधिकारिक री-शेड्यूल किया। इस कारण ट्रेन 9 तारीख की तड़के 2:49 बजे जाकर मुंबई से रवाना हो पाई। सोचिए, जिस दिन यात्री ट्रेन में होने वाले थे उस दिन तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी भी नहीं थी।
यह ट्रेन मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और बरौनी होकर सहरसा तक जाती है। ट्रेन इतनी देरी से निकली है कि अब इसके आगमन का अनुमान लगाना भी मुश्किल हो गया है। खबर लिखे जाने तक फिलहाल, ट्रेन भुसावल के आसपास पहुंचने वाली है, यानी अभी गंतव्य तक का सफर लंबा बाकी है।
त्योहारी सीजन में यात्रियों ने महीनों पहले टिकट बुक की, परिवार और सामान के साथ स्टेशन पर पहुंचे, पर ट्रेन गायब है। कई यात्रियों ने कहा, “67 घंटे लेट मतलब 3 दिन। इतने में तो हम घर पहुंचकर लौट भी आते।” एक यात्री ने कहा, “रेलवे ने फेस्टिवल स्पेशल तो चलाया, पर रैक का इंतजाम नहीं, ये कैसा प्लानिंग है?” गौरतलब है कि त्योहारों के मौसम में रेलवे हर साल अतिरिक्त ट्रेनें चलाती है ताकि प्रवासी बिहार और पूरब के यात्री घर पहुंच सकें।
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