बिहार में विधान परिषद की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए जेडीयू ने भगवान सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बना दिया। इससे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के खेमे में नाराजगी है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को काराकाट के साथ एक एमएलसी सीट भी देने का वादा किया था। काराकाट तो कुशवाहा जीत नहीं पाए। अब आरजेडी से एमएलसी रहे रामबली चंद्रवंशी की सदस्यता रद्द होने के बाद उनकी सीट पर हो रहे उपचुनाव में आरएलएम को मौका नहीं मिला है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू, एमएलसी सीट के बदले उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा में जाने का मौका दे सकती है।
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बिहार से राज्यसभा की दो सीटें खाली हुई हैं। आरजेडी की सांसद मीसा भारती पाटलिपुत्र से लोकसभा का चुनाव जीत गईं। बीजेपी के राज्यसभा से सांसद रहे विवेक ठाकुर भी नवादा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए हैं। अब इन दोनों सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिन पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है।
एक सीट पर बीजेपी तो दूसरी जेडीयू के खाते में जा सकती है। जेडीयू अपने कोटे से आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेज सकती है। इसकी चर्चा सियासी गलियारों में हो रही है। हालांकि, अभी तक नीतीश कुमार की पार्टी की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। राज्यसभा की दोनों सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना भी अभी जारी नहीं हुई है। ऐसे में समय आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान एनडीए के सीट बंटवारे में राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक सीट (काराकाट) मिलने पर उपेंद्र कुशवाहा नाराज हो गए थे। बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की और कुशवाहा से वादा किया कि उन्हें आगामी विधान परिषद के चुनाव में भी एक सीट दे दी जाएगी। इस पर कुशवाहा राजी हो गए, यह बात उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भी बताई थी।
अब विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है, जिस पर जेडीयू ने अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी नाराज हो गई है। आरएलएम की ओर से बीजेपी को अपना पुराना वादा याद दिलाया जा रहा है। उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर मसला सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। चर्चा है कि जेडीयू उन्हें राज्यसभा की एक सीट देकर मना सकती है। हालांकि, इसके लिए बीजेपी और हम की सहमति भी जरूरी होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यसभा के उपचुनाव में दोनों सीटों का अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी होगा। दोनों सीटों के लिए अलग-अलग वोटिंग होगी। सभी विधायक हर सीट के लिए वोट करेंगे। जिसके पास बहुमत होगा, वही जीतेगा। बिहार में अभी एनडीए की सरकार है और बीजेपी-जेडीयू के पास बहुमत है। ऐसे में दोनों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत लगभग तय होगी। हालांकि, चुनाव अनिश्चितताओं का खेल होता है, क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण बदलने से नतीजे भी बदल सकते हैं। इसलिए अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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