आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव कथित ‘जमीन के बदले नौकरी घोटाला’ मामले में पूछताछ के लिए सोमवार को पटना स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्यालय पहुंचे, जहां करीब 10 घंटे से भी अधिक ईडी टीम के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। लालू के साथ उनकी बेटी मीसा भारती भी मौजूद रहीं और वे सोमवार को सुबह 11 बजकर पांच मिनट पर ईडी कार्यालय पहुंचे थे। लालू यादव को खाना और दवा देने के लिए खुद मीसा ईडी दफ्तर पहुंची थी।
इससे पहले लालू के ईडी जोनल कार्यालय (बैंक रोड) में सुबह पूछताछ के लिए पहुंचने के साथ ही राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी पहुंच गया। कार्यालय के मेन गेट से उनके अंदर जाते ही साथ आई बेटी सांसद मीसा भारती समेत अन्य को बाहर ही रोक दिया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और ईडी के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी।
बीच-बीच में हंगामा और नारेबाजी बढ़ती रही। इससे मुख्य सड़क भी जाम हो गई, जिसे पुलिस बल ने थोड़ी देर बाद खाली करा दिया। कार्यकर्ताओं की नारेबाजी के बीच सांसद मीसा भारती समेत कई पार्टी नेताओं के बयान का क्रम भी जारी रहा। लालू प्रसाद के करीब रात 9 बजे बाहर निकलने तक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा। उनके बाहर आते ही फिर से जोरदार नारेबाजी की गई। उनकी गाड़ी के पीछे अनेक नेताओं की गाड़ियों का काफिला उनके आवास तक गया।
सुबह यह सूचना मिली कि ईडी लालू प्रसाद के 10 सर्कूलर रोड स्थित सरकारी आवास में ही पहुंच कर पूछताछ करेगी। लेकिन थोड़ी देर की ऊहापोह के बाद यह स्पष्ट हो गया कि लालू प्रसाद ही ईडी कार्यालय पहुंच रहे हैं और ऐसा ही हुआ। उनके यहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ यहां पहुंचने लगे। ईडी कार्यालय के सामने मौजूद दादीजी मंदिर में सांसद मीसा भारती समेत अन्य सभी कुर्सी लगाकर बैठ गए।
इसमें एमएलसी सुनील कुमार सिंह, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, दानापुर विधायक रीतलाल यादव, पूर्व मंत्री चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री रामचंद्र राम, महनार विधायक मुकेश रौशन, मसौढ़ी विधायक रेखा पासवान, विधायक मुन्ना सिंह, प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, अरुण यादव समेत अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं का हुजूम और नारेबाजी को देखते हुए ईडी कार्यालय के बाहर सीआरपीएफ की एक बटालियन को शाम करीब 6 बजे तैनात कर दिया गया। कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को सीआरपीएफ जवानों ने अपने अधीन ले लिया और आसपास के इलाके की चौकसी भी बढ़ा दी गई।
ईडी की तरफ से 50 से अधिक सवालों की लंबी सूची का एक-एक करके जवाब देने के क्रम में लालू प्रसाद थोड़ा झल्लाए भी, बीच-बीच में थोड़ा उठकर घूमे भी। ताकि थोड़ा रिलैक्स हो सकें। एक सवाल को कई बार पूछे जाने या घुमाकर पूछना और क्रास क्वेश्चन करना उनकी झल्लाहट की मुख्य वजह थी। हालांकि वे तुरंत सामान्य होकर अपने चिर-परिचित मुस्कान के साथ फिर जवाब देने लगते।
ईडी से मिली जानकारी के मुताबिक सवालों का जवाब देने में लालूजी औसतन 90 सेकेंड का समय ले रहे थे। ईडी ने उनसे पूछा कि नौकरी के बदल जमीन कैसे ली। ईडी की दायर चार्जशीट में नामजद अभियुक्त और इस मामले में लालू के खिलाफ बयान देने वाले ह्रदय नारायण चौधरी से मुलाकात कब हुई, कहां हुई और कैसे जमीन लिखवाई। नौकरी पहले दी गई या जमीन को पहले ट्रांसफर करवाया गया था। इस घोटाले में सहयोगी रहे लोगों को नौकरी पुरस्कार में मिला या उन्हें पैसे दिये गये। क्या किसी से पैसे लेकर भी नौकरी दी गई है। ईडी ने अमित कातयाल, मेसर्स एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड, एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य कंपनियों से जुड़े सवाल भी पूछे।
सांसद मीसा भारती ने कहा कि जब भी चुनाव का समय आता है, उनके परिवार को इसी तरह से परेशान किया जाता है। सिर्फ लालू यादव ही नहीं हेमंत सोरेन, अरविंद केजरीवाल से लेकर बंगाल और महाराष्ट्र तक सिर्फ विपक्षी दल और इससे जुड़े नेता पर कारवाई क्यों हो रही है। एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि यह सभी को पता है कि लालू प्रसाद को क्यों बुलाकर उनसे पूछताछ की जा रही है। यह राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है। प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि चुनाव को देखते हुए बेवजह उन्हें परेशान किया जा रहा है।
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