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समस्तीपुर: अवैध अस्पतालों की जांच में बरती जा रही लापरवाही, प्रबंधन की कट रही चांदी

समस्तीपुर : जिले में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम एवं निजी अस्पतालों के मकड़जाल फैला है। ऐसे नर्सिंग होम एवं अस्पताल में अलग-अलग समय मे इलाज कराने आये मरीजों की मौत एवं मौत के बाद हंगामा भी होती रहा है। पुलिस भी हंगामा के बाद पहुंचती है। लेकिन अधिकांश मामले में एक तय राशि की लेन-देन होने के बाद समाप्त हो जाते हैं। डीएम या सीएस के आदेश निर्देश पर अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों की गठित टीम जांच भी करती है। लेकिन एक दिन भी किसी अस्पताल को बंद होते नहीं देखा गया है। अनुमंडल अस्पताल में इलाज व जांच की सुविधा है।

बावजूद अवैध निजी अस्पताल फल फूल रहे हैं। विभाग या प्रशासन का ऐसे अस्पतालों पर कोई नियंत्रण नजर नहीं आता है। फलत: लाचार मरीज व उनके परिजन अधिक राशि खर्च करके भी बेहतर इलाज से वंचित रह जाते हैं। बताते हैं मैट्रिक, इंटर व ग्रेजुएट तक शिक्षा ग्रहण करनेवाले लोग भी अपने नाम के पहले डॉक्टर लिखकर अस्पताल में इलाज के साथ-साथ ऑपरेशन भी कर रहे हैं।

दलसिंहसराय अनुमंडल अस्पताल का इलाका ही नहीं एनएच 28 का क्षेत्र भी अवैध नर्सिंग होम चलानेवाले का पसंदीदा जगह बना है। मंसूरचक रोड में ऐसे अस्पताल हैं। जहां मरीजों का इलाज कम आर्थिक दोहन एवं शोषण की शिकायतें रही है। अल्ट्रासाउंड जांच हो या अन्य जांच जगह-जगह निजी स्तर पर किया जा रहा है। अस्पताल संचालक अपने परिसर या आस-पास जांच घर भी चला रहे हैं।

पूर्व में डीएम एवं सीएस के निर्देश पर अनुमंडल अस्पताल के तत्कालीन डीएस डॉ. अरुण कुमार ने 15 अस्पताल संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज करायी थी। हालांकि जांच के 6 माह बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। ऐसा तब हो सका था जब मानवाधिकार आयोग ने एक शिकायत पर संज्ञान लिया था। लेकिन प्राथमिकी के बाद भी कोई अंतर नजर नहीं आया। स्थिति यह है कि अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। यहां डॉक्टरों के कई नाम बोर्ड पर अंकित रहते हैं। लेकिन आरोप लगता रहा है कि बिना चिकित्सक एवं मेडिकल उपकरण के ही मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम की वसूली होती है। जनहित में ऐसे अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने को प्रबुद्ध लोगों ने जरूरी बताया है।

Avinash Roy

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