बांग्लादेश में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है। उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में सुनवाई के दौरान उन्हें दोषी पाया गया। शेख हसीना की गैरमौजूदगी में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। यह मुकदमा पिछले साल छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के लिए है। इस आंदोलन के चलते शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। वहीं, उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा था। वहीं, सजा की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी है। इसके चलते यूनुस सरकार अलर्ट पर है।
बता दें कि जुलाई 2024 में आर्थिक तंगी, भ्रष्टाचार और रोजगार संकट से उपजे छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। पांच अगस्त को वह भारत चली गईं और बांग्लादेश में यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। बाद में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने कहा है कि हसीना और उनकी सरकार ने सत्ता बनाए रखने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर व्यवस्थित रूप से घातक बल का प्रयोग किया। इसमें लगभग 1,400 लोग मारे गए। शेख हसीना ने मुकदमे में शामिल होने के लिए भारत से लौटने से इनकार कर दिया है। साथ ही उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है कि उन्होंने भागने से पहले के हफ्तों में सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
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