टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले स्टार भारतीय जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंक) नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक 2024 में भी इतिहास रच दिया है. उन्होंने पेरिस में भी सिल्वर जीतकर अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.
टोक्यो ओलंपिक के सिल्वर मेडल विजेता चेक गणराज्य के याकूब वालेश, जर्मनी के जूलियन वेबर और पूर्व वर्ल्ड चैम्पियन ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स के अलावा पाकिस्तान के अरशद नदीम से नीरज को कड़ी चुनौती मिली.
नीरज का सीजन बेस्ट थ्रो, अरशद ने तोड़ा ओलंपिक रिकॉर्ड
मगर नीरज ने 89.45 मीटर दूर भाला फेंकते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है. नीरज का यह इस सीजन का बेस्ट थ्रो है. इससे पूर्व नीरज ने इसी पेरिस ओलंपिक के क्वालिफिकेशन राउंड में 89.34 मीटर दूर भाला फेंका था.
जबकि अरशद ने रिकॉर्ड 92.97 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड अपने नाम किया है. यह नया ओलंपिक रिकॉर्ड है. अरशद ने नॉर्वे के एंड्रियास थोरकिल्डसेन (Andreas THORKILDSEN) का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. एंड्रियास ने यह रिकॉर्ड 23 अगस्त 2008 को बीजिंग ओलंपिक में 90.57 मीटर दूर भाला फेंककर भाला बनाया था.
नीरज ने रचा इतिहास, ऐसा करने वाले पहले भारतीय
इस मेडल के साथ ही 26 साल के नीरज चोपड़ा ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. वो लगातार 2 ओलंपिक के व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. इससे पहले भारत के लिए व्यक्तिगत इवेंट (शूटिंग) में अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग 2008 में गोल्ड जीता था. मगर वो इसके बाद कोई मेडल नहीं जीत सके.
नीरज यदि गोल्ड जीतते तो ओलंपिक के इतिहास में खिताब बरकरार रखने वाले दुनिया के 5वें और भारत के पहले खिलाड़ी बन सकते थे. इसके साथ ही ओलंपिक के व्यक्तिगत इवेंट में 2 गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय भी बन सकते थे. मगर वो इस रिकॉर्ड से चूक गए.
इसके अलावा ओलंपिक में इससे पहले व्यक्तिगत इवेंट में रेसलर सुशील कुमार और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ही कोई भी दो मेडल जीत सके हैं. उनके बाद नीरज तीसरे भारतीय हैं, जिन्होंने ओलंपिक में कोई भी 2 मेडल जीते हैं. हालांकि सुशील और सिंधु गोल्ड नहीं जीत सके थे. उन्होंने 2008 बीजिंग में ब्रॉन्ज और फिर लंदन 2012 में सिल्वर मेडल जीता था. जबकि सिंधु ने 2016 रियो में सिल्वर और टोक्यो 2020 में ब्रॉन्ज जीता था.
ये 4 दिग्गज हासिल कर चुके हैं यह उपलब्धि
ओलंपिक की पुरुष भालाफेंक स्पर्धा में अभी तक एरिक लेमिंग (स्वीडन 1908 और 1912), जोन्नी माइरा (फिनलैंड 1920 और 1924), नीरज के आदर्श जान जेलेंजी (चेक गणराज्य 1992 और 1996) और आंद्रियास टी (नॉर्वे 2004 और 2008) की ओलंपिक में भालाफेंक स्पर्धा में खिताब बरकरार रख सके हैं.
ओलंपिक से पहले इस साल चोपड़ा ने सिर्फ तीन स्पर्धाओं में भाग लिया, लेकिन उनके बाकी प्रतिस्पर्धी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे. दोहा डायमंड लीग में मई में चोपड़ा ने 88.36 मीटर का थ्रो फेंका, वहीं एडक्टर में असहजता के कारण 28 मई को ओस्ट्रावा गोल्डन स्पाइक में एहतियात के तौर पर भाग नहीं लिया.
चोट से ठीक होकर लौटे नीरज ने किया कमाल
उन्होंने जून में फिनलैंड में पावो नुरमी खेलों में 85.97 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण के साथ वापसी की. इसके बाद 7 जुलाई को पेरिस डायमंड लीग में भाग नहीं लिया. उनके कोच ने फिटनेस को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा था कि अब उनके एडक्टर में कोई परेशानी नहीं है और वह कड़ा अभ्यास कर रहे.
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