बीजेपी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही एनडीए ने सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुन लिया है, इसके बाद यह साफ हो चुका है कि केंद्र में एक बार फिर ‘मोदी सरकार’ बनेगी. बुधवार को सात लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास में बैठक हुई. इस बैठक में एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने एक सुर में कहा कि नरेंद्र मोदी के पास ‘विकसित भारत’ के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण है. हम सभी इस लक्ष्य को हासिल करने में भागीदार बनने को तैयार हैं.
खबरों की मानें तो सात जून यानी शुक्रवार को एनडीए की एक और बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक के बाद राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सकता है. शपथ ग्रहण समारोह की तारीख को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, हालांकि मीडिया में जो खबरें चल रहीं हैं, उसके अनुसार 9 जून को नरेंद्र मोदी पीएम पद की शपथ ले सकते हैं. इस बीच लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि इस बार मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में किसे जगह मिल सकती है.
गौरतलब है कि केंद्र में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनाने की कवायद जारी है. एनडीए के घटक दल की इस बार सरकार में अहम भूमिका हो सकती है. तीसरी बार मोदी कैबिनेट कैसा होगा इसे लेकर अभी असमंजस की स्थिति हैं, हालांकि मीडिया रिपोर्ट से आ रही जानकारी के मुताबिक जेडीयू और टीडीपी दोनों केंद्र सरकार में बड़ी हिस्सेदारी मांग सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार में तीन अहम मंत्रालय के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष का पद मांगा है. गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष का पद हासिल किया था. इधर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू केंद्र सरकार में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर सकती है. हालांकि जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने साफ करते हुए तीन मंत्रालय वाली मांग को खारिज कर दिया है. उन्होंने विशेष तौर पर कहा है कि हमारी कोई मांग नहीं है. हम प्रधानमंत्री के साथ हैं.
बता दें, कर्नाटक में 2 सीटें जीतने वाले जेडीएस नेता कुमारस्वामी अपने बेटे के लिए कृषि मंत्रालय और दामाद सीएन मंजूनाथ के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की मांग कर रहे हैं. जबकि एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कैबिनेट में दो-तीन मंत्री पद पर कहा है कि मैं ऐसी सभी बातों का खंडन करता हूं. उन्होंने कहा कि उनकी कोई मांग नहीं है. अपनी बात पर जोर देते हुए चिराग ने कहा कि कोई मांग नहीं हो सकती क्योंकि हमारा लक्ष्य था नरेंद्र मोदी को फिर से पीएम बनाएं. उन्होंने कहा कि सभी सहयोगियों ने इसके प्रति ईमानदार भूमिका निभाई. कैबिनेट पद आवंटित करना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है. इसलिए, किसी भी सहयोगी दल की ओर से कोई मांग नहीं है.
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