आज घोड़े पर सवार हो आ रही हैं मां दुर्गा, जानें घटस्थापना मुहूर्त एवं सही विधि

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आज से चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है. मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी पर आ रही हैं. आज प्रात: 06:10 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बना हुआ है, वहीं इंद्र योग सुबह 08:31 बजे तक और रेवती नक्षत्र दिन में 11:21 बजे तक है. ये योग और नक्षत्र मांगलिक कार्यों के लिए शुभ हैं. वैसे भी जहां आदिशक्ति मां दुर्गा के पैर पड़ते हैं, वहां सबकुछ शुभ और मंगलमय हो जाता है. आज सबसे पहले घटस्थापना या कलश स्थापना करेंगे, उसके बाद मां दुर्गा का आह्वान करेंगे. फिर नवरात्रि की पूजा शुरु होगी. आइए जानते हैं कलश स्थापना मुहूर्त (Kalash Sthapana Muhurat), घटस्थापना विधि (Ghatasthapana Vidhi) और पूजन सामग्री के बारे में.

कलश स्थापना की सामग्री

मिट्टी का कलश, मिट्टी का एक बड़ा बर्तन, मिट्टी के ढक्कन, आम की 5 हरी पत्तियां, फूल, माला, एक सिक्का, जौ, साफ एवं पवित्र मिट्टी, अक्षत्, मौली, रक्षासूत्र, साफ जल, गंगाजल, दूर्वा, छोटा लाल कपड़ा या लाल चुनरी, सूखा नारियल, सुपारी आदि.

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 2022

आज प्रात: 06 बजकर 10 मिनट से प्रात: 08 बजकर 31 मिनट तक कलश स्थापना का सुबह मुहूर्त है. यदि आप इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर में 12 बजे से लेकर 12:50 बजे के मध्य कभी भी कर सकते हैं.

चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना विधि

स्नान के बाद सर्वप्रथम कलश स्थापना की सामग्री को एक स्थान पर एकत्र कर लें. फिर पूजा स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा में साफ स्थान पर मिट्टी फैला दें. फिर उस पर जौ डाल दें. उसके बाद फिर मिट्टी डालें. अब पानी छिड़क दें, ताकि जौ को उगने के लिए पूरी नमी हो जाए.

अब आप मिट्टी के कलश के गर्दन पर रक्षासूत्र बांध दें. कलश पर कुमकुम या रोली से तिलक लगाएं और माता पहना दें. इसके बाद कलश के अंदर गंगाजल डालें, फिर उसे साफ जल से भर दें. अब कलश के अंदर अक्षत्, दूर्वा, सिक्का, फूल, सुपारी आदि डाल दें.

इसके पश्चार आम या फिर अशोक के पांच पत्ते कलश में डाल दें. फिर उस कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढक दें. अब आपका कलश तैयार हो गया. इसके बाद सूखे नारियल में कलावा या रक्षासूत्र बांध दें. इसके बाद कलश को जौ वाले स्थान पर स्थापित करें. फिर कलश के ढक्कन को अक्षत् से भर दें और उस पर रक्षासूत्र बंधे नारियल को स्थापित कर दें. इस प्रकार से चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना हो गई. अब आप प्रथम पूज्य गणेश जी, वरुण देव समेत अन्य देवी देवताओं की पूजा करेंगे. फिर मां दुर्गा का सच्चे मन से आह्वान करेंगे. इसके पश्चात मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैत्रपुत्री की पूजा विधिपूर्वक करेंगे.

Avinash Roy

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