Bihar

शहीद सैनिकों के सम्मान में नीतीश सरकार, आश्रितों को खेती के लिए एक एकड़ जमीन दी जाएगी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के आश्रितों के साथ सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर नई और स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। विभाग स्तर पर गठित समिति के विचार-विमर्श के बाद जारी निर्देशों के अनुसार, युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों के आश्रितों को गृह जिला के गृह प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए एक एकड़ या आवासीय उपयोग के लिए पांच डिसमिल सरकारी जमीन बंदोबस्त की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नई बंदोबस्ती प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के आश्रितों को उनके गृह जिले में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए भूमि उपलब्ध हो। हमने स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवहारिक मानक तय किए हैं, ताकि पात्र परिवारों को बिना अनावश्यक विलंब के तत्काल लाभ मिल सके। यह निर्णय हमारे सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। सचिव जय सिंह की ओर से जारी पत्र के अनुसार यह सुविधा उन सैनिकों के आश्रितों को मिलेगी, जिन्होंने कम से कम छह माह तक लगातार सैनिक सेवा की हो और कार्यरत रहते हुए युद्ध में शहादत पाई हो। ऐसे मामलों में आश्रितों से सलामी ली जाएगी, लेकिन पांच वर्षों तक वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा।

पैरा मिलिट्री को भी यह सुविधा

निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल सेना ही नहीं, बल्कि युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य बलों जैसे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड और असम राइफल्स के जवान यदि युद्ध में वीरगति प्राप्त करते हैं, तो उनके आश्रित भी इसी प्रावधान के तहत भूमि बंदोबस्ती के पात्र होंगे। हालांकि, इसके लिए सेलर्स, सोल्जर्स एवं एयरमेन बोर्ड की अनुशंसा और न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। विभाग ने यह शर्त भी रखी है कि भूमि बंदोबस्ती से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि आश्रित बिहार राज्य का निवासी हो और उसके पास आवास के लिए पहले से निजी जमीन न हो। यदि निजी आवासीय जमीन उपलब्ध पाई जाती है, तो बंदोबस्ती नहीं की जाएगी।

डीएम को भूमि बंदोबस्ती का अधिकार

डीएम को पूर्व की तरह ही इस प्रकार की भूमि बंदोबस्ती का अधिकार रहेगा, लेकिन यह केवल ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी, विवादमुक्त जमीन पर ही लागू होगा। साथ ही, यह भी अनिवार्य किया गया है कि चयनित भूमि भूदान, भू-हदबंदी, सैरात, कब्रिस्तान, श्मशान, धार्मिक स्थलों, अतिक्रमण और न्यायालयीन विवाद से पूरी तरह मुक्त हो। इस आदेश की तिथि से पूर्व सैनिकों के साथ भूमि बंदोबस्ती से संबंधित सभी पुराने आदेश और पत्र स्वतः प्रभावहीन माने जाएंगे। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

Avinash Roy

Recent Posts

समस्तीपुर में आम हड़ताल के समर्थन में सड़कों पर उतरे कर्मचारी, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

समस्तीपुर : अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को बिहार राज्य…

34 मिनट ago

आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर हमला मामले में पांच नामजद अभियुक्तों पर FIR दर्ज

समस्तीपुर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रहमतपुर गांव में बुधवार को एक आरोपी की गिरफ्तारी…

1 घंटा ago

बेटी ने अपने ही मां पर लगाया जबरदस्ती गलत काम करवाने का आरोप, हंगामे की सूचना पर पहुंची डायल-112 की पुलिस टीम

समस्तीपुर : नगर थाना क्षेत्र के डीआरएम कार्यालय के पीछे वाले सड़क पर गुरूवार की…

2 घंटे ago

जहर खाने से महिला की मौ’त, श्मशान घाट से समस्तीपुर पुलिस ने शव जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जितवारपुर निजामत वार्ड-19 में बुधवार को…

2 घंटे ago

PM मोदी और उनकी मां को गाली देने वाले शख्स को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को अपशब्द बोलने वाले आरोपी को जमानत मिल गई है.…

3 घंटे ago

समस्तीपुर में झोपड़ी से 44 लाख रुपए नगद बरामदगी को लेकर लगाए जा रहे तरह-तरह के कयास

समस्तीपुर/चकमेहसी : चकमेहसी थाना क्षेत्र के सैदपुर पंचायत के वार्ड संख्या-3 सहूरी गांव के एक…

8 घंटे ago