बिहार में गाड़ियों पर VIP और फैंसी नंबर रखने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. लोग अपनी पसंद का नंबर लेने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं. इस रेस में राजधानी पटना सबसे आगे है. राज्य के बिहार परिवहन विभाग ने पिछले दो महीनों में फैंसी नंबरों की ई-नीलामी से 5.95 करोड़ रुपये कमाए हैं. यह जानकारी परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने दी.
विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 दिसंबर 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच 4,117 वाहन मालिकों ने ई-ऑक्शन में हिस्सा लिया. सबने अपनी पसंद का नंबर चुनने के लिए बोली लगाई.
ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता
फैंसी नंबर के लिए ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम शुरू किया गया है. इच्छुक वाहन मालिक पहले रजिस्ट्रेशन करते हैं. फिर तय समय पर वेबसाइट के जरिए बोली लगाते हैं. जो सबसे ज्यादा रकम देता है, वही नंबर जीतता है. मंत्री ने कहा कि दो महीनों में इतनी बड़ी कमाई पहली बार हुई है.
पटना नंबर वन, छोटे जिलों में कम रुचि
पटना के लोगों ने फैंसी नंबरों पर 2.46 करोड़ रुपये खर्च किए. मुजफ्फरपुर से 52.17 लाख रुपये की कमाई हुई. गया से 41 लाख और पूर्णिया से 33.53 लाख रुपये आए. वहीं खगड़िया में सिर्फ 93,500 रुपये और शिवहर में 52,000 रुपये की बोली लगी. यहां रुचि सबसे कम दिखी.
इन नंबरों की सबसे ज्यादा मांग
सबसे ज्यादा डिमांड 0001, 0003, 0005, 0007 और 0009 नंबर की रही. इन्हें ग्रुप A में रखा गया है. नॉन-ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए इनकी रिजर्व कीमत 1 लाख रुपये है. ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए 35,000 रुपये तय किए गए हैं.
स्टेटस सिंबल बन रहा फैंसी नंबर
फैंसी नंबर अब स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है. लोग अपनी पहचान अलग दिखाने के लिए खास नंबर चुन रहे हैं. सरकार को भी इससे मोटा राजस्व मिल रहा है. आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
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