बिहार पुलिस के अफसरों पर मुकदमे से पहले लेनी होगी अनुमति, IPS को अरेस्ट करने की कोशिश के बाद अधिसूचना जारी

बिहार पुलिस के पदाधिकरी या कर्मी राज्य में कहीं भी पदस्थापित हों, उनपर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित प्राधिकार को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसको लेकर बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार को अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना को हाल ही में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार नायक की आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए गिरफ्तारी के प्रयास से जोड़ कर देखा जा रहा है।
अधिसूचना में कहा गया है कि बिहार पुलिस के सभी वर्ग एवं प्रवर्ग के सदस्यों, जिन्हें लोक व्यवस्था बनाये रखने का प्रभार सौंपा गया है, जहां कहीं भी सेवा कर रहे हैं, उन पर बीएनएसएस 2023 की धारा 218 की उपधारा (2) के उपबंध लागू होंगे। इस उपधारा में आने वाले ”केंद्रीय सरकार” के पद के स्थान पर ”राज्य सरकार” पद माना जाएगा।

बीएनएसएस धारा 218 (2) यह अनिवार्य करती है कि ड्यूटी से संबंधित कार्यों के लिए पुलिस कर्मियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने से पहले सरकारी मंजूरी आवश्यक है। यह प्रावधान प्रतिशोधात्मक शिकायतों को पुलिस के कामकाज में बाधा डालने से रोकने के लिए बनाया गया है।

नवनियुक्त 22 हजार सिपाही चलाएंगे छोटे-बड़े हथियार, मिलेगी ट्रेनिंग
बिहार पुलिस में नवनियुक्त 22 हजार सिपाहियों को छोटे-बड़े सभी तरह के हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान वह लक्ष्य साधते हुए अभ्यास करेंगे। अप्रैल तक इसका अभ्यास पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। नवनियुक्त सिपाहियों का प्रशिक्षण पिछले साल जुलाई से ही शुरू है।

सिपाहियों के प्रशिक्षण की समीक्षा को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक संजय सिंह ने बैठक की। इसमें प्रशिक्षुओं को नैतिक रूप से सबल बनाने, अनुशासन के दायरे में रखने तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया। प्रशिक्षुओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी विशेष तौर पर देने को कहा गया है।

एडीजी ने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और फीडबैक प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कार्यशाला और विशेष सत्र आयोजित किया जाए। बैठक में प्रशिक्षण प्रभाग के डीआइजी, एआइजी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और उप-प्राचार्य आदि उपिस्थत रहे.


