बिहार की निजी एम्बुलेंस को भी एकीकृत आपातकालीन नंबर 112 से जोड़ा जाएगा। पूर्व में लिए गए निर्णय पर परिवहन विभाग अमल में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है कि वह शीघ्र इस दिशा में कार्रवाई करे, ताकि सड़क दुर्घटना के घायलों को अविलंब अस्पताल पहुंचाया जा सके।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाल ही में परिवहन सचिव राज कुमार ने सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा की थी। इसमें पाया गया कि मिजोरम के बाद बिहार देश का दूसरा राज्य है, जहां सड़क दुर्घटना में सबसे अधिक मौतें हो रही हैं। इसका मूल कारण राज्य में एम्बुलेंस की कमी बताई गई।
निजी और सरकारी एम्बुलेंस की संख्या लगभग 3700 है। इनमें भी सरकार के अधीन लगभग दो हजार एम्बुलेंस ही कार्यरत हैं। ऐसे में जब दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए डायल 112 पर कॉल की जाती है तो एम्बुलेंस आने में अधिक समय लग रहा है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार किसी मरीज के कॉल करने पर 10 मिनट के भीतर उसे एंबुलेंस की सुविधा मिल जानी चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कम से कम मरीजों को औसतन 25 मिनट में एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
बिहार के 55 अस्पताल ट्रॉमा सेंटर के रूप में चिह्नित हैं। चिह्नित अस्पतालों में लेबल दो के 10, लेबल तीन के 35 और एकीकृत ट्रॉमा सेंटर एवं आपातकाल सेवा के रूप में 10 अस्पताल अधिसूचित हैं। लेबल दो वाले अस्पतालों में 200 से अधिक बेड रखने हैं। इनमें 20 बेड का ट्रॉमा सेंटर होना चाहिए। लेबल तीन में 100 बेड का होना जरूरी है। इसमें ट्रॉमा के लिए 10 बेड, जिनमें पांच बेड आईसीयू और पांच बेड ट्रॉमा इमरजेंसी के लिए रखना है।
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