बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस अपने भतीजे से पुराना हिसाब चुकाना चाहते हैं. पशुपति पारस ने कहा है कि चिराग पासवान ने पार्टी और परिवार को तोड़ने का काम किया है. यही वजह है कि वो बिहार विधानसभा चुनाव में जहां-जहां कैंडिडेट उतारेंगे, वहां उनकी पार्टी की तरफ से भी कैंडिडेट उतारे जाएंगे. महागठबंधन में उन्हें जितने भी सीट मिले उन सीटों पर तो वो चुनाव लड़ेंगे ही, इसके अलावा जहां भी चिराग पासवान के कैंडिडेट होंगे, वहां वो निर्दलीय उम्मीदवार उतार कर उन्हें हराने की कोशिश करेंगे.
4 साल पुराना बदला लेने की तैयारी में पशुपति
जून 2021 में चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार परस के बीच पार्टी नियंत्रण का खुला संघर्ष शुरू हुआ. 14 जून 2021 को पारस को लोक जनशक्ति पार्टी का लोकसभा नेतृत्व दिया गया और अगले ही दिन यानी 15 जून 2021 को चिराग को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटाने/बदले जाने जैसे घटनाक्रमों के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. चिराग ने भी विरोधी सांसदों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के अंदर उभरे सत्ता-संघर्ष ने चिराग पासवान को अपने चाचा से दूर अलग रास्ते पर ला दिया था.
चुनाव आयोग ने अक्टूबर 2021 में पार्टी के दो गुटों के लिए अलग-अलग नाम और प्रतीक जारी कर दिए; चिराग का गुट अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के रूप में दर्ज है. वहीं, पशुपति गुट ने राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी बनाई. उस समय लोजपा के 6 सांसद में पांच पशुपति के साथ हो गए.
इसके बाद चिराग पासवान ने लोकसभा चुनाव 2024 तक इंतजार किया. बीजेपी ने पशुपति पारस की पार्टी की जगह चिराग पासवान की नई पार्टी से लोकसभा गठबंधन कर लिया. साथ ही पशुपति पारस को एक सीट भी नहीं मिली. उसके बाद चिराग ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह भी बनाई. जून 2024 में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया, जिससे उनकी साख को बढ़ावा मिला.
अप्रैल 2025 में पशुपति ने एनडीए का साथ छोड़ दिया
पशुपति कुमार पारस ने अप्रैल 2025 में साफ़ किया कि उनकी पार्टी अब बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए का घटक नहीं रहेगी. यह ऐलान उन्होंने उस समय किया जब उन्हें और उनके गुट को पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों में टिकट नहीं दिए जाने को लेकर नाराज़गी थी. फिलहाल राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का ना कोई विधायक और ना ही सांसद. पशुपति इस समय महागठबंधन के साथ है. सूत्रों के अनुसार ने उन्हें 5 सीट का ऑफर दिया जा सकता है.
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