ईयरफोन के इस्तेमाल से कम उम्र में ही श्रवण शक्ति कम हो रही है। इंटरनेट-सोशल साइट पर अधिक समय देना और ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। सबसे अधिक युवा इसके शिकार हो रहे हैं। लगातार ईयरफोन लगाए रखने से कान के परदे में छेद होने की आशंका रहती है। साथ ही कान की हड्डी और नस भी कमजोर होती है। ये बातें केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ डॉ.पीयूष प्रिय ने कहीं। वे रविवार को पटना में आयोजित ‘डॉक्टर की सलाह कार्यक्रम’ में राज्यभर से आए मरीजों के सवाल का फोन पर जवाब दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि सीजीएचएस के ओपीडी में हर दिन करीब 20 फीसदी युवा मरीज कान से कम सुनने की समस्या लेकर आ रहे हैं। इसका एकमात्र कारण ईयरफोन है। हालांकि उम्र के साथ सुनने की क्षमता भी कम होती है। शरीर के अन्य हिस्से जैसे कमजोर होते हैं, वैसे कान की हड्डी भी कमजोर होती है। लेकिन, यह अक्सर 40 की उम्र के बाद से शुरू होता है। ईयरफोन से अब कम उम्र में ही ऐसी समस्याएं होने लगी है।
डॉ.पीयूष प्रिय ने बताया कि कोरोना से पहले ऐसा देखा गया था कि साल में औसतन दो बार ही लोगों को सर्दी-खांसी की शिकायत रहती थी। लेकिन, कोरोना के बाद से साल में चार बार लोगों को सर्दी-खांसी की समस्या हो गई है। शहरी क्षेत्र में प्रदूषण और लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षतमा का कम होना है। उन्होंने बताया कि बच्चों में नाक की हड्डी टेढ़ी होने की भी शिकायत रहती है। समय रहते बच्चों की टेढ़ी नाक का इलाज करा लेना चाहिए नहीं तो आगे चलकर सरकारी नौकरी के लिए मेडिकल जांच के दौरान परेशानी हो सकती है।
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