रोहतास के नौहट्टा ब्लॉक के चपला गांव में एक घटना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को चर्चा में ला दिया. गांव की रहने वाली एक रंजू देवी नामक महिला ने राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान दावा किया कि उनके परिवार के छह लोगों के नाम मतदाता सूची में हटा दिए गए हैं. हालांकि, बाद में वह अपने दावे से मुकर गईं और कहा कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी. उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं.
रंजू ने बताया कि उन्होंने स्थानीय लोगों यात्रा में लेकर गए थे और उन्हीं लोगों ने उसे राहुल गांधी से मिलवाया, जहां उन्होंने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. हालांकि, बाद में रंजू ने स्पष्ट किया कि उन्हें गांव के पंचायत सचिव और वार्ड सचिव ने गलत जानकारी दी थी. ये घटनाक्रम 17 अगस्त का है, जब राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा रोहतास के सासाराम में थी.
‘हमें नहीं थी जानकारी’
उन्होंने कहा, ‘हमें बताया गया कि हमारा और हमारे परिवार के पांच-छह लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. वार्ड सचिव ने कहा कि राहुल गांधी आ रहे हैं, उनसे यह बात कहनी है. हम गांव के साधारण लोग हैं, पढ़े-लिखे कम हैं, इसलिए हमें सही जानकारी नहीं थी.’
रंजू देवी ने बताया कि जब जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनके घर पर जाकर जांच की तो पता चला कि उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद हैं.
लिस्ट में मौजूद है सभी का नाम
रंजू देवी ने ये भी खुलासा किया कि वे सासाराम में जिलाधिकारी (DM) के पास गई थीं, जहां उन्हें पुष्टि हुई कि उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट में हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में उन्होंने गलत जानकारी दे दी थी, क्योंकि उन्हें गलत तरीके से निर्देशित किया गया था.
महिला के पति का कहना है कि पहले बताया गया था कि वोटर लिस्ट में हमारा नाम नहीं है. वार्ड सदस्य और वार्ड सचिव ने बताया कि हमारा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इससे हम लोग डर गए और उनके कहने पर राहुल गांधी के पास चले गए. पर बाद में हम लोगों को पता चला कि हमारा नाम वोटर लिस्ट में मौजूद है.
क्या है मामला
बता दें कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ECI ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) शुरू किया है. इस पहल के तहत बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन किया गया था. इसका मकसद मतदाता सूची को सटीक, समावेशी और विसंगतियों से मुक्त करना है. बिहार में SIR की शुरुआत 24 जून 2025 को हुई थी, और 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई. वहीं, इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों में सरकार पर गंभीर वोट चोरी आरोप लगाया है और कांग्रेस-आरजेडी ने वोटर अधिकार यात्रा शुरू की है.
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