Bihar

आज से बिहार विधानसभा का मानसून सत्र, सदन में पेश होंगे 12 बिल, कानून व्यवस्था पर नीतीश सरकार को घेरेगा विपक्ष

बिहार विधानमंडल के सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र में नीतीश सरकार दर्जनभर विधेयक लाएगी। इनमें चार मूल जबकि आठ संशोधन विधेयक हैं। बिहार विधानसभा तथा बिहार विधान परिषद से इन्हें पारित करा सरकार शीघ्र ही विधेयकों को कानून की शक्ल में राज्य में लागू करेगी। इनमें से आधा दर्जन से अधिक विधेयक युवाओं, बेरोजगारों, कामगारों, रैयतों आदि के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

मौजूदा सरकार और 17वीं विधानसभा का अंतिम पांच दिवसीय सत्र (सोमवार से शुक्रवार तक) छोटा किंतु पक्ष-विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण है। इस सत्र के बाद प्रदेश की पार्टियां चुनावी मैदान में उतरेंगी। इस लिहाज से दोनों पक्ष मानसून सत्र को अपने पाले में करने की तैयारी में हैं। विपक्ष जहां मतदाता सत्यापन और विधि व्यवस्था के मसले पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है वहीं सत्ता पक्ष भी विरोधियों के हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। 21 जुलाई को पहले दिन दोनों सदनों में लगभग 50 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।

विधानमंडल में 22 और 23 जुलाई को राजकीय विधेयक पेश किये जाएंगे। श्रम संसाधन विभाग के 4, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 3, वित्त, पशु एवं मत्स्य संसाधन, नगर विकास एवं आवास, विधि और वाणिज्यकर विभागों के एक-एक विधेयक सरकार ला रही है। जो 12 विधेयक पेश होने हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण है जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक 2025। इसके जरिए जहां राज्य में पहले कौशल विवि की स्थापना हो सकेगी वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य के 1 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की घोषणा का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

विधेयक के जरिए प्रावधान किया जाएगा कि किस तरह इतनी बड़ी तादाद में युवाओं को कौशलयुक्त बना उन्हें रोजगार दिया जाएगा। छोटे दुकानों में काम करने वाले कामगारों के लिए भी सेवाशर्त तय होगी। स्वीगी और जोमैटो आदि में अंशकालिक (गीग) कामगारों के हितों की रक्षा के लिए भी बिल लाया जा रहा है। नगर निकायों के अधिकारों को बढ़ाने की तैयारी सरकार ने संशोधन विधेयक के जरिए की है। पिछले साल अधिकारों में कटौती को लेकर नगर निकायों के प्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई थी। अब सरकार वर्तमान में लागू प्रावधानों की चार धाराओं में संशोधन करने जा रही है।

जमीन विवाद की प्रमंडल स्तर पर होगी सुनवाई

भूमि राजस्व से जुड़े तीन अहम बिल पेश होंगे। विशेष भूमि सर्वेक्षण बिल में सेटलमेंट आफिसर का निर्णय अंतिम होता था। अब प्रमंडल स्तर पर अपीलीय प्राधिकार होगा। शहरी क्षेत्रों में भी सर्वे का प्रावधान होगा। कृषि भूमि को अन्य कार्यों में उपयोग के लिए डीसीएलआर और समकक्ष पदाधिकारी भी नामित होंगे। जमीन दर तय करने का प्रावधान अब नियमावली से होगी।

Avinash Roy

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