Bihar

बिहार: रोज लाखों लीटर भूमिगत पानी ले रहा पेप्सी प्लांट! 12 फीट गिरा जलस्तर; गिरिराज बोले- बंद हो प्लांट, कंपनी बोली- लोगों को भ्रम

बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी में सॉफ्ट ड्रिंक के प्लांट के चलते भारी स्तर पर भू-जल स्तर गिरने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि बरौनी में बियाडा (बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) जिन इलाकों में है वहां करीब 10-20 किमी के दायरे में 20 फीट तक जलस्तर गिर गया है। यह हालत महज चार साल के भीतर हुआ है। गांव वालों का आरोप है कि ऐसा वरुण बेवरेज और पेप्सी के प्लांट की बॉटलिंग प्लांट के चलते हो रहा है।

सांसद गिरिराज सिंह ने प्लांट बंद करने की मांग की

गांव वाले लगातार गिरिते भू-जल स्तर की शिकायत लेकर स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह के पास पहुंचे। इसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, ‘देखिए यहां के जनमानस, यहां के किसान, यहां के निवासी, चार साल हुआ है, पेप्सी का प्लांट जब से खुला है। अभी यहां गांव के किसान लोग हस्ताक्षर अभियान करा रहे हैं। पेप्सी के प्लांट के कारण जो भूजल स्तर गिरा है इससे सभी को कठिनाई हो रही है। पानी पीने को कठिनाई हो रही है, किसान को कठिनाई हो रही है।

उन्होंने कहा कि एक दो किलोमीटर नहीं, 10 से 20 किलोमीटर तक पानी का स्तर एक तो पहले ही गिर रहा था, लेकिन जब से ये खुला है तब से ये और ज्यादा। सबसे बड़ी बात है, मुख्यमंत्री ने उस समय घोषणा की थी कि ये गंगा नदी से पानी लेंगे। साथ ही हार्वेस्ट करेंगे। ये ना तो गंगा से जल ले रहे हैं, ना हार्वेस्ट कर रहे हैं। जन आंदोलन उभर रहा है, इसलिए तत्काल इसको बंद करना पड़ेगा। आगे जो आ रहा है उसका लोग विरोध करेंगे।’

लोगों को भ्रम है कि प्लांट के चलते भूजलस्तर गिर रहा: प्लांट हेड मनोज द्विवेदी

वहीं गिरते जलस्तर के सवाल पर वरुण बेवरेज के प्लांट हेड मनोज द्विवेदी ने कहा कि ये लोगों को भ्रम है कि पेप्सी की फैक्ट्री लगी तो ज्यादा पानी खींच रहे हैं। जबकि हम जितना पानी खींचते हैं उससे ज्यादा पानी सोसाइटी को देते हैं। हमें पानी के लिए जो एनओसी मिली है उसमें लिखा है कि आपको 50 फीसदी पानी चार्ज करना है। हम 50 फीसदी से ज्यादा पानी चार्ज करते हैं। लोगों का भ्रम है कि यहां लेवल डाउन होता जा रहा है।

सरकार के नियम अनुसार हम पानी की गहराई मापने के लिए फैदोमीटर (Fathometer) लगा रखा है। वह टेलीमैट्रिक है। उसका सारा डेटा ऑनलाइन साइट पर जाता है। जहां हर रोज पता चलता रहता है कि यहां पानी का लेवल कम हो रहा है या बढ़ रहा है। अगर 2023, 2024 और 2025 में प्राप्त डेटा की तुलना करें तो पता चलता है कि इस इलाके में पानी का जल स्तर ऊपर आ रहा है। क्योंकि हम पानी को रीचार्ज करते हैं। हम पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर भेजते हैं। हमारे सारे डेटा ऑनलाइन हैं, इसलिए इसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने बताया कि बेगूसराय के इस प्लांट में करीब 500 लोग कार्यरत हैं, जिसमें करीब 83 फीसदी बिहार के हैं। इतना ही नहीं, इसमें करीब 65 फीसदी लोग बेगूसराय के आसपास के लोग हैं। आसपास के आईटीआई और बीटेक कॉलेजों के पढ़े करीब 50 अप्रेंटिस स्टूडेंट को यहां ट्रेनिंग दी गई, जिसके बाद उनकी योग्यता अनुसार उन्हें यहां नौकरी दी गई।

Avinash Roy

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