Bihar

मंत्री अशोक चौधरी के ट्वीट से गरमाई बिहार की राजनीति, सीएम से डेढ़ घंटे मुलाकात, बोले-‘नितीश मेरे पिता समान’

बिहार की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों में जनता दल यूनाइटेड के भीतर तनाव और असंतोष उभरता दिख रहा है। इसका केंद्र बिंदु बने हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री अशोक चौधरी। जिनके एक ट्वीट ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। चौधरी ने बुढ़ापे पर एक कविता ट्वीट की। जिसे उनके और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच दरार का संकेत माना जा रहा है।

चौधरी का ट्वीट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाया गया। यहां नीतीश कुमार और अशोक चौधरी के बीच लंबी बातचीत हुई। इसके बाद चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि मेरी सोशल मीडिया पोस्ट सामान्य थी। मैं नीतीश कुमार के खिलाफ ट्वीट क्यों करूँगा। मैं नीतीश को अपना पिता मानता हूँ। चौधरी के इस बयान ने उनकी पार्टी के प्रति वफादारी को दर्शाते हुए आंतरिक मतभेद की अफवाहों को विराम देने की कोशिश की।

अशोक चौधरी नीतीश कुमार सरकार में ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री हैं। पार्टी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनके बयानों ने पार्टी के भीतर चल रहे समीकरणों पर बहस छेड़ दी है। चौधरी का यह विवाद ऐसे समय में आया है। जब जेडीयू 2025 के चुनावों की तैयारियों में जुटी है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनका ध्यान चुनावों पर है और वह पार्टी के प्रति पूरी तरह वफ़ादार हैं।

जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कोई भी नीतीश कुमार पर सवाल नहीं उठा सकता। आज जेडीयू की पहचान नीतीश कुमार से है। नीरज कुमार का यह बयान पार्टी में नीतीश कुमार की सर्वोच्चता और उनकी अद्वितीय भूमिका को रेखांकित करता है।

अशोक चौधरी की भूमिहार जाति पर की गई टिप्पणी भी विवाद का हिस्सा बनी। उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव के दौरान भूमिहार जाति ने नीतीश कुमार को समर्थन नहीं दिया था। हालांकि जेडीयू ने इस बयान पर ज्यादा ध्यान न देते हुए इसे आंतरिक विवाद से दूर रखने की रणनीति अपनाई।

चौधरी के विवादास्पद ट्वीट और उनके बाद की घटनाओं ने जेडीयू के भीतर के आंतरिक समीकरणों को उजागर किया है। हालांकि पार्टी की ओर से सार्वजनिक रूप से एकजुटता का प्रदर्शन किया जा रहा है। अशोक चौधरी ने अपने और नीतीश कुमार के रिश्ते को पिता-पुत्र जैसा बताया। जो इस बात का संकेत है कि मतभेद होने के बावजूद उनके संबंध मजबूत हैं।

2025 के चुनावों को देखते हुए जेडीयू के लिए आंतरिक एकता और बाहरी छवि को बनाए रखना जरूरी है। अशोक चौधरी के मामले ने दिखाया कि पार्टी अपने नेताओं के बीच के मतभेदों को कैसे संभालती है और एक मजबूत मोर्चे के रूप में उभरने की तैयारी कर रही है।

Avinash Roy

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