Bihar

बांग्लादेश हिंसा का बिहार के मछली कारोबार पर बुरा असर, सीमांचल से सौदा बंद, क्या कहते हैं एक्सपोर्टर?

यहां क्लिक कर हमसे व्हाट्सएप पर जुड़े 

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंसा शुरू होने के बाद बिहार के मछली कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। पिछले एक हफ्ते से कोसी, सीमांचल, मिथिलांचल, पूर्वी बिहार की मछलियां नहीं भेजी जा रही हैं। बांग्लादेश के आयातकों (इम्पोर्टर) ने शांति-व्यवस्था पटरी पर लौटने तक सौदा बंद कर दिया है। कई आयातकों ने कोलकाता स्थित एक्सपोर्टरों से कहा कि हालात ठीक होने पर दोबारा कारोबार करेंगे। अब सावन खत्म होने पर है। तीन दिन बाद बिहार में ही मछलियों की खपत बढ़ने लगेगी। ऐसे में स्थानीय मछलियां भरपूर मात्रा में बाजार में उपलब्ध रहेंगी।

150 टन मछलियां बिहार से रोज बांग्लादेश जाती थीं

बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहयोग समिति के निदेशक नरेश सहनी ने बताया कि प्रतिदिन बंगाल के रास्ते बिहार से करीब 150 टन मछलियां बांग्लादेश जाती थीं। इसमें खगड़यिा, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, नवगछिया, कटिहार आदि से बड़े पैमाने पर निर्यात होती थीं। मत्स्य कृषकों को लोकल से अधिक कीमत भी मिल जाती थी और पैसा अग्रिम मिलता था। अब बांग्लादेश से अस्थायी रूप से संपर्क भंग है तो यहां की मछलियां पश्चिमी बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में ही बेचनी पड़ेंगी। जिसकी कीमत बांग्लादेश के मुकाबले कम मिलेगी। इंटरनेशनल क्लेक्टिव इन सपोर्ट ऑफ फिश वर्कर्स (आईसीएसएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में बांग्लादेश में 49 लाख टन की मछलियां खपत हुईं।

फ्रोजेन और ड्राई फिश 16 हजार टन बांग्लादेश को उपलब्ध कराया

यहां की जरूरत के लिए डिपार्टमेंट ऑफ फिश अथॉरिटी, दिल्ली ने फ्रोजेन और ड्राई फिश 16 हजार टन बांग्लादेश को उपलब्ध कराया। इसके अलावा बिहार में 8.46 हजार टन उत्पादन से 16-17 प्रतिशत बांग्लादेश भेजा गया।

ढाका में मांग बढ़ी तो बिहार से मंगाईं मछलियां

फिश इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट कंपनी से जुड़े श्यामल दास बताते हैं, बांग्लादेश का मुख्य आहार मछली है। यहां मछलियों की जरूरत की पूर्ति थाईलैंड से होती थी। पिछले पांच साल में थाईलैंड में मछली उत्पादन में बेतहाशा कमी आई तो पड़ोसी देश भारत से फिर आवक बढ़ गई। बंगाल से मछलियां कार्गो से एक्सपोर्ट होने लगी। ऐसे में बिहार से मछलियां मंगाकर बांग्लादेश भेजी गईं।

क्या कहते हैं अधिकारी?

भागलपुर के जिला मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया का कहना है कि इससे कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि बांग्लादेश मछलियां नहीं जाएंगी तो यहां के बाजार में बिकेंगी। आंध्र प्रदेश से मछलियों की आवक कम होगी। इसका आर्थिक लाभ मछली विक्रेताओं को होगा। वे कहते हैं कि बिहार के मछली उत्पादकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

Avinash Roy

Recent Posts

‘द उम्मीद कप 2026’ का आगाज, पहले क्वार्टर फाइनल में बेगूसराय ने खगड़िया को हराया

समस्तीपुर : सामाजिक संस्था द उम्मीद की ओर से आयोजित 'द उम्मीद कप 2026' बिहार…

6 घंटे ago

जाली टिकट के साथ यात्रा कर रहे चार यात्री पकड़े गए, दो पर समस्तीपुर GRP थाना में प्राथमिकी दर्ज

समस्तीपुर : जाली रेलवे टिकट के साथ यात्रा करने के मामले में रेल थाना (GRP)…

11 घंटे ago

फर्जी शिक्षक नियुक्ति मामले में प्रधानाध्यापिका व कथित शिक्षक पर FIR, वेतन भुगतान की साजिश का आरोप

समस्तीपुर/सरायरंजन : समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड के नौआचक पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय, नौआचक वार्ड…

12 घंटे ago

विश्वविद्यालय परिसर में हुए चर्चित एसिड ब्लास्ट कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

समस्तीपुर/पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा परिसर में हुए चर्चित एसिड ब्लास्ट…

12 घंटे ago

कर्पूरीग्राम के लोगों के लिए खुशखबरी, अब यहां भी रूकेगी बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन

समस्तीपुर : उत्तर बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. दिल्ली जाने वाली…

13 घंटे ago

डॉली और उसके पहले पति पर ह’त्या का मामला दर्ज, महिला हिरासत में

समस्तीपुर : प्रेम-प्रसंग से जुड़े मामले में सूरज सोनी की संदिग्ध मौत को लेकर मृतक…

14 घंटे ago