विकासशील इंसान पार्टी के नेता और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी आज पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को लेकर मैंने कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया था, लेकिन फिर भी अगर किसी को उस बयान से दुख पहुंचा हो, तो मैं खेद प्रकट करता हूं.
उन्होंने कहा कि मेरे बयान को तोड़मरोड़ कर पेश कर दिया गया. उन्होंने कहा कि मेरा कहना साफ है कि बीजेपी पिछले करीब 17 साल सत्ता में रही, अगर उसकी नीयत मंडल कमीशन के 40 सिफारिशों को लागू करने की होती तो कर देती.
मुकेश सहनी ने सुरक्षा वापस लेने पर भी भड़कते हुए कहा कि बयान देने के कुछ ही समय के बाद उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई. उन्होंने कहा कि सुरक्षा देना या वापस लेने की एक प्रक्रिया होती है, लेकिन जिन्हें संविधान की परवाह नहीं वह सभी संस्थाओं को जेब में रख चुके हैं. इसी की लड़ाई हमलोग लड़ रहे हैं.
उन्होंने साफ लहजे में कहा कि मैं निषादों के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा. अपने हक, अधिकार की लड़ाई लड़ना गुनाह है, तो फांसी पर लटका दीजिए. मरवा दीजिए.
सन ऑफ मल्लाह के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ने कहा कि बीजेपी नवंबर में निषाद आरक्षण की बात की थी, लेकिन नीतीश कुमार के एनडीए में आने के बाद वह पीछे हट गई. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि मैं गुलाम बनकर नहीं रह सकता, शुरू से संघर्ष करता रहा हूं, आगे भी करता रहूंगा. उनकी अभी सरकार है फांसी दे दे, लेकिन संघर्ष का रास्ता नहीं छोडूंगा.
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