Bihar

BPSC शिक्षक और सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में कूरियर कंपनी की भूमिका संदिग्ध

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बीपीएससी की ओर से आयोजित शिक्षक (टायर-3) बहाली परीक्षा का प्रश्न-पत्र कूरियर या लॉजिस्टिक कंपनी के कर्मियों की मिलीभगत से लीक हुआ है। अब इस मामले की जांच में इसके तार सिपाही बहाली की परीक्षा में हुए पेपर लीक से भी काफी नजदीक से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ईओयू से मिली जानकारी के मुताबिक सिपाही बहाली की परीक्षा के प्रश्न-पत्र को ढोने का ठेका डीपी वर्ल्ड नामक कूरियर कंपनी के पास था। लेकिन इस कंपनी ने अवैध तरीके से इस काम में जेनिथ लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को भी शामिल कर लिया था।

अनाधिकृत रूप से यह कंपनी भी प्रश्न-पत्रों को ढोने का काम कर रही थी। इस कंपनी के दो मुंशी राहुल पासवान और रमेश पासवान भी सिपाही परीक्षा के अभ्यर्थी थे। राहुल की परीक्षा 1 अक्टूबर, 2023 और रमेश की परीक्षा 15 नवंबर को होने वाली थी। यह बड़ा सवाल है कि जिस कंपनी को प्रश्न-पत्र ढोने का ठेका मिला ही नहीं था, वह किसके कहने या किसकी अनुमति से इसे ढो रही थी। कब और कहां से इसे किसकी अनुमति से प्रश्न-पत्र किस सेंटर तक ले जाने के लिए सौंपा गया था, इसकी तफ्तीश अभी चल रही है।

ईओयू द्वारा अब तक की गई जांच और गिरफ्तार अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर पूछताछ में कई अहम बातें सामने आई है। इसमें जेनिथ नाम की कूरियर कंपनी की संदिग्ध भूमिका का खुलासा हुआ है। इसी कंपनी के पास डीटीडीसी कूरियर कंपनी के साथ संयुक्त रूप से बीपीएससी शिक्षक बहाली टीयर-3 के प्रश्न-पत्र को ढोने का ठेका था। इन दोनों कंपनियों के कर्मियों ने ही इसे नवादा ले जाने के दौरान डॉ. शिव और उसके पिता संजीव कुमार की देखरेख में लीक करवाया था। जेनिथ कंपनी की हरकतें इतनी संदिग्ध होने के बाद भी उसे प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों को ढोने का ठेका कैसे मिल जाता था, इसकी जांच भी चल रही है। अगर दूसरी कंपनी को भी यह ठेका मिलता था, तब भी यह कंपनी कैसे इस काम में घुस जाती थी। इसका खुलासा भी जल्द होने की संभावना है।

कूरियर कंपनी के संरक्षकों का पता लगाया जा रहा

दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले की जांच में कई समानताएं सामने आई हैं। यह मुख्य रूप से कूरियर कंपनियों जेनिथ और डीपी वर्ल्ड को लेकर ही है। किसी बड़ी कूरियर कंपनी को भी किसी प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्न-पत्र के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेवारी मिलती थी, तब भी इन दोनों कंपनियों की मिलीभगत पाई जाती थी। जांच एजेंसी इनकी आयोगों में साठगांठ के अलावा इनके संरक्षकों के बारे में भी पता लगाने में जुटी हुई है। सेटरों को प्रश्न-पत्र के लाने ले जाने के रूट से लेकर अन्य सभी जानकारी किसके स्तर से लीक होती थी, इसकी पड़ताल की जा रही है।

Avinash Roy

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