बिहार में भीषण गर्मी पर आपदा प्रबंधन का अलर्ट; बंद हो सकते हैं स्कूल, सभी डीएम को भेजा पत्र, दिए ये निर्देश
राज्य में भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए स्कूलों के संचालन के संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग ने निर्देश जारी किया है। भीषण गर्मी और लू से बच्चों को बचाने के लिए स्कूल सुबह की पाली में संचालित करने या फिर गर्मी की छुट्टी निर्धारित समय से पूर्व घोषित करने के लिए कहा गया है। गर्मी की स्थिति को देखते हुए स्कूलों को अल्प अवधि के लिए बंद किया जा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारियों को समीक्षा कर निर्णय लेना चाहिए।
भीषण गर्मी और लू से बचने के उपाय से संबंधित कार्रवाई के लिए आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने शिक्षा, स्वास्थ्य सहित सभी संबंधित विभागों के प्रमुखों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। बच्चों को लू तथा गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए सभी स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर पेयजल का इंतजाम सुनिश्चित करना होगा। ओआरएस की व्यवस्था भी करने को कहा गया है।

राज्य में भीषण गर्मी और तपिश को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। राज्य के लोगों और पशु पक्षियों को बचाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य, शिक्षा, पशु व मत्स्य संसाधन विभाग सहित 15 विभागों को दी गई है। विभागों को कहा है कि वे अपने-अपने स्तर से संभावित भीषण गर्मी व लू से निबटने की तैयारी कर लें। खासकर पेयजल संकट से निबटने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने विभागों और जिलों को पत्र भेजा है। जिलास्तर पर जागरूकता कार्यक्रम के लिए कहा है। साथ ही हीट वेब एक्शन प्लान के तहत संबंधित कार्यालय व निकायों को लू से बचाव (सनस्ट्रोक) के लिए निर्देश दिया है।

इन विभागों को मिली जिम्मेदारी
नगर विकास- शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक पियाऊ की व्यवस्था। आश्रय स्थलों में पेयजल व स्लम के लोगों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता।
स्वास्थ्य- सभी अस्पतालों में लू से प्रभावितों के इलाज की व्यवस्था। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस पैकेट, जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता। आईसोलेशन वार्ड व गंभीर रूप से बीमार लोगों को विशेष इंतजाम और चलंत चिकित्सा दल की व्यवस्था करने को कहा गया है।

पीएचईडी- खराब चापाकलों को युद्धस्तर पर मरम्मत करने को कहा गया है। पेयजल संकट वाले इलाकों में टैंकरों की व्यवस्था करने और भू-गर्भ जलस्तर की निगरानी करने को कहा गया है।
शिक्षा विभाग- विद्यालयों को सुबह की पाली में संचालित करने या गर्मी की छ्ट्टी पहले करने के लिए कहा।

समाज कल्याण- आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेयजल की व्यवस्था, नवजात शिशु, बच्चों व महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा का इंतजाम करने को कहा है।
पशुपालन- सरकारी ट्यूबवेल या अन्य स्थानों पर गड्ढा खोदकर पशुओं के पानी का इंतजाम। पशुओं के लिए चिकित्सा दल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण विकास- मनरेगा के तहत तालाब, आहर, पईन आदि की खुदाई की योजना में तेजी लाने के निर्देश।
पंचायती राज- लू के दौरान क्या करें, क्या न करें, इसका प्रचार-प्रसार। गांवों में पेयजल की व्यवस्था।
श्रम संसाधन- मजदूरों के कार्यवधि में बदलाव। कार्यस्थल पर पेयजल, मजदूरों के बीच जागरुकता कैंप।

परिवहन- वाहनों का परिचालन कम होगा। दिन के 11 बजे से साढ़े तीन बजे तक वाहनों को नियंत्रित करना।
ऊर्जा- बिजली के ढीले तारों को दुरुस्त करना होगा, ताकि तारों के टकरानों से अगलगी की घटना नहीं हो।
पर्यावरण- वन्य जीव उद्यानों में जानवरों के पिंजरे को ठंडा रखने का इंतजाम। पर्यटन स्थलों पर पेयजल।

सूचना एवं जनसंपर्क- लू से बचाव के उपाय से संबंधित विज्ञापन का प्रचार-प्रसार सार्वजनिक माध्यमों से करना।
सूचना प्रावैद्यिकी- लू से बचाव को राज्य व जिलास्तर पर डैशबोर्ड बनेगा और एसएमएस भेजने की व्यवस्था।
राज्य अग्निशमन निदेशालय- अगलगी की घटना से निबटने व रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई करना